ताजा खबरें | कर्नाटक के दो समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने संबंधी विधेयक को लोकसभा की मंजूरी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कांग्रेस पर आदिवासियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि अगर विपक्षी पार्टी को जनजातीय समुदायों की इतनी चिंता थी तब राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ अपने उम्मीदवार को वापस क्यों नहीं लिया और उन्हें हराने का प्रयास क्यों किया?
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कांग्रेस पर आदिवासियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि अगर विपक्षी पार्टी को जनजातीय समुदायों की इतनी चिंता थी तब राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ अपने उम्मीदवार को वापस क्यों नहीं लिया और उन्हें हराने का प्रयास क्यों किया?
लोकसभा में ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022’ पर चर्चा का जवाब देते हुए मुंडा ने यह बात कही।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने लम्बे समय तक आदिवासियों की अनदेखी की और इनकी कथनी और करनी में भारी अंतर है।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के समय 2013-14 में जनजातियों से जुड़ा बजट 19 हजार करोड़ रूपये का था जो अब बढ़कर 87 हजार करोड़ रूपये का हो गया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जनजातियों के लिए छात्रवृत्ति अब 400 करोड़ रूपये की हो गई तथा लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 15 लाख हो गई है।
कर्नाटक के समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किये जाने के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दबे-कुचले, सुदूरवर्ती वर्गों की आवाज पर पहले ध्यान नहीं दिया गया, क्योंकि ‘‘नीलगिरि पर्वत की आवाज दिल्ली तक पहुंचे, उसे सुनने और उसके स्पंदन को समझने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्ति होना चाहिए’’।
उन्होंने कहा कि इसलिए छोटे-छोटे समुदायों की आवाज को स्थान देने एवं उनका कल्याण सुनिश्चित करने के लिये विधेयक लाये जा रहे हैं और समुदायों को उचित सम्मान दिया जा रहा है।
मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने कर्नाटक के काडू कुरूबा एवं बेट्टा कुरूबा समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022’ को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।
मुंडा ने कहा कि हमारी सरकार में ऐसे समुदायों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनकी संख्या काफी कम है, जिनकी आवाज उपेक्षित रही है।
उन्होंने कहा कि जब, ‘‘हम ‘जी 20’ सम्मेलन की बात कर रहे हैं तब हमें दुनिया के समक्ष इस बात को पेश करना चाहिए कि एक भी व्यक्ति अपने अधिकारों से वंचित नहीं हो और गरिमामयी ढंग से जीवन जीता हो। सदन में इस बात पर चर्चा हो।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन वंचित समुदायों को उचित स्थान प्रदान करना वोट की राजनीति नहीं बल्कि लोकतंत्र की ताकत का परिचायक है।
दीपक वैभव
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