लॉकडाउन: जम्मू में प्रवासी श्रमिक भविष्य को लेकर परेशान, जाना चाहते हैं घर
उत्तर प्रदेश के निवासी रतिपाल चौहान के पास रोजगार नहीं है और पिछले आठ महीने में उन्होंने जो कुछ भी बचाया था, वह खत्म हो गया है।
जम्मू, तीन मई देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर जम्मू के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे हजारों श्रमिकों को देशव्यापी लॉकडाउन के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के निवासी रतिपाल चौहान के पास रोजगार नहीं है और पिछले आठ महीने में उन्होंने जो कुछ भी बचाया था, वह खत्म हो गया है।
बस्ती जिले के बर्दिया लोहार गांव के निवासी 28 वर्षीय चौहान ने कहा, “निकट भविष्य में स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। संकट के इस समय में अपने परिवार के साथ रहना ही बेहतर है।’’
चौहान पिछले एक दशक से अधिक समय से जम्मू में टाइल्स और संगमरमर लगाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनके साथ उनके गांव के 23 निवासी घर जाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “यह सब किसी तरह बीत जाए…, हम अपने परिवार के साथ रहना चाहते हैं। हम जीने के लिए अपने खेत पर काम करेंगे जो कि घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहते हुए संभव नहीं है।”
चौहान ने यह भी कहा कि उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है और अपने भोजन के लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।
जम्मू की तवी विहार कॉलोनी में चौहान के साथ रह रहे सभी प्रवासी श्रमिकों ने उनसे सहमति जताई।
श्रमिकों के समूह को रहने के लिए प्रतिमाह 1700 रुपये किराया देना पड़ता है।
चौहान और उनके दो भाई जहां जम्मू में फंसे हैं वहीं उनके एक और भाई बेंगलुरु में हैं।
पेशे से मिस्त्री राजेश ने कहा कि उन्होंने 25 मार्च को घर के लिए प्रस्थान करने की योजना बनाई थी लेकिन अकस्मात लॉकडाउन की घोषणा होने से सब कुछ बदल गया।
उन्होंने कहा, “अब सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को एक राज्य से दूसरे राज्य भेजने का निर्णय लिया है तो हमें आशा है कि हम जल्दी ही अपने घर पहुंच जाएंगे।”
राजेश ने कहा कि उनके बैंक खाते में एक भी पैसा नहीं आया और न ही पिछले एक महीने से उन्हें राशन दिया गया है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब के श्रमिकों का एक समूह घर जाने की व्यवस्था करने की मांग को लेकर जम्मू के संभाग आयुक्त कार्यालय के बाहर शनिवार को एकत्रित हुआ था।
छत्तीसगढ़ के एक निवासी राजिंदर (60) ने कहा, “हमें दिनभर का भोजन जुटाने में परेशानी हो रही है। पिछले कुछ हफ्तों में कई बार कुछ सरकारी अधिकारी आकर हमारी जानकारी ले गए लेकिन कोई सहायता नहीं दी गई।”
राजिंदर के साथ उनके गांव के 150 निवासी जम्मू के सिधारा क्षेत्र में किराये की झुग्गियों में रह रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के निवासी और मिस्त्री नेरू लाल (58) ने कहा, “सरकार हमें हमारे घर पहुंचाने की व्यवस्था कर दे तो बड़ी मेहरबानी होगी। लॉकडाउन में यहां रहने का कोई फायदा नहीं है।”
उन्होंने कहा, “हम यहां रहेंगे तो भूख से मर जाएंगे। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में बहुत समय लगेगा।”
पांच सौ श्रमिकों का एक अन्य समूह यहां रेलवे स्टेशन के पास रह रहा है।
उन्होंने विभिन्न सरकारी एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों और सामाजिक समूहों के प्रति आभार व्यक्त किया।
ओडिशा के नरेश कुमार ने कहा, “सरकार, गैर सरकारी संगठन और सामाजिक समूहों ने आगे आकर हमें राशन और भोजन दिया। हम सरकार और जम्मू के लोगों को धन्यवाद देते हैं।”
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(The above story first appeared on LatestLY on May 03, 2020 08:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

