लॉकडाउन : सिक्किम में सरकारी कार्यालय खुले, चुनिंदा गतिविधियों में काम शुरू
अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस के मद्देनजर देश में लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाया गया है । इस दौरान राज्य सरकार के कार्यालय खुले और रोस्टर के आधार पर एक तिहाई कर्मचारी उपस्थित हुये ।
गंगटोक, 20 अप्रैल कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिये देशभर लागू लॉकडाउन के संबंध में 15 अप्रैल को केंद्र की ओर से जारी समेकित संशोधित दिशानिर्देशों का पालन करते हुए सिक्किम में सोमवार को सरकारी कार्यालयों में कामकाज शुरू हुआ और चुनिंदा गतिविधियों में काम चालू हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस के मद्देनजर देश में लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाया गया है । इस दौरान राज्य सरकार के कार्यालय खुले और रोस्टर के आधार पर एक तिहाई कर्मचारी उपस्थित हुये ।
राज्य सरकार ने सिक्किम राष्ट्रीयकृत परिवहन (एसएनटी) की तीन बसों को कर्मचारियों को लाने-ले जाने के लिये परिचालन की अनुमति दी है ।
उल्लेखनीय बात यह है कि सिक्किम अबतक कोविड—19 मुक्त राज्य है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को तीन मई तक देशव्यापी लॉकडाउन को बढ़ाने की घोषणा की थी । इसके बाद केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, तथा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर समेकित संशोधित दिशा-निर्देश 15 अप्रैल को जारी किए गए थे।
लॉकडाउन पहले 25 मार्च से 14 अप्रैल तक था ।
उन्होंने बताया कि राज्य में कृषि एवं निर्माण गतिविधियां शर्तों के साथ शुरू हुयी हैं, किसानों से सामजिक मेल जोल से दूरी बनाये रखने के लिये कहा गया है और निर्माण कार्य केवल स्थानीय श्रमिकों के द्वारा किया जायेगा ।
उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन बिजली परियोजनायें और दवाओं तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के निर्माण की भी अनुमति दी गयी है ।
निर्माण में काम आने वाली वस्तुओं की ढुलाई में लगी ट्रकों एवं भारी वाहनों स्क्रीनिंग के बाद ही सिक्किम की सड़कों पर आने की अनुमति दी गई।
आबकारी विभाग ने शराब की खुदरा दुकान शुष्क दिवसों को छोड़कर सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक खोलने की अनुमति दी है ।.
विस्तारित लॉकडाउन के दौरान मांस की दुकानों एवं वेट बाजारों को को भी छूट दी गई है ।
हालांकि, अंतरराज्यीय यातायात को प्रतिबंधित किया गया है और निजी एवं सार्वजनिक परिवहन वाहनों के चलने पर रोक है ।
राज्य की सड़कों पर केवल उन्हीं वाहनों का परिचालन होगा जिन्हें जिला प्रशासन से अनुमति होगी ।
प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों को दो-दो वाहन दिये गये हैं, जिसमें से एक चिकित्सा आपात स्थिति के लिये है जबकि दूसरा वाहन आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई के लिये हैं ।
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