एजेंसी न्यूज

जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारों में गिरावट से स्थानीय तेल-तिलहनों के भाव लुढ़के

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में गिरावट आने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सभी तेल-तिलहनों की कीमतें हानि दर्शाती बंद हुईं।

जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारों में गिरावट से स्थानीय तेल-तिलहनों के भाव लुढ़के

नयी दिल्ली, पांच जुलाई विदेशी बाजारों में गिरावट आने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सभी तेल-तिलहनों की कीमतें हानि दर्शाती बंद हुईं।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग छह प्रतिशत तथा शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग 5.5 प्रतिशत की गिरावट है। विदेशी बाजारों में इस जोरदार गिरावट के कारण सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ, पामोलीन, बिनौला तेल सहित लगभग सभी तेल-तिलहनों में गिरावट देखने को मिली।

सूत्रों ने कहा कि सरकार ने बुधवार को खाद्य तेलों की महंगाई के संदर्भ में चर्चा करने के लिए तेल कंपनियों के साथ बैठक करने का निर्णय किया है। ऐसी उम्मीद जाहिर की जा रही है कि बैठक में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कमी किये जाने के बारे में तेल कंपनियों को कहा जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि लगभग छह महीने पहले ही तेल कंपनियों के साथ हुई बैठक में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने माना था कि खाद्य तेलों की एमआरपी अधिक है जिसे उन्होंने दुरुस्त कर कम करने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन इस बीच विदेशों में तेल के भाव भारी गिरावट आने के बावजूद इन कंपनियों ने अपने एमआरपी में बहुत मामूली कमी की और उपभोक्ताओं को नुकसान होना जारी रहा। सूत्रों ने कहा कि ऐसी बैठकों के अपेक्षित परिणाम तभी निकलेंगे जब एमआरपी के संदर्भ में कोई सख्त कानून बने और उसका सख्ती से क्रियान्वयन हो।

सूत्रों ने कहा कि लगभग महीने भर पहले सीपीओ का भाव 2,050 डॉलर प्रति टन था जो विदेशों में बाजार टूटने के बाद अब 40-45 प्रतिशत घटकर 1,160 डॉलर प्रति टन रह गया है। इस बात को देखने की जरूरत है कि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को अभी यही तेल किस भाव पर बेचा जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि आयातक बहुत ही बुरी हालत में हैं और बंदरगाहों पर उनके लाखों टन खाद्य तेल की खेप पड़ी है जिसे वे बहुत कम भाव पर छोटे-छोटे खेपों में खपाने को मजबूर हैं। दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। इन आयातकों द्वारा बैंक से लिया गया कर्ज डूबने की आशंका है।’’

सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के मामले में अनिश्चितता को केवल तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाकर ही दूर किया जा सकता है।

मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 7,310-7,360 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,665 - 6,790 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,595 - 2,785 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,310-2,390 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,350-2,455 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 12,750 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 11,500 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 6,300-6,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 6,050- 6,100 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 05, 2022 08:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).