देश की खबरें | दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर एलओसी जारी नहीं कर सकते: दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि जब धोखाधड़ी या पैसे की हेराफेरी का कोई आरोप न हो तो बैंक कर्ज वसूली के लिए दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी नहीं कर सकता।

नयी दिल्ली, 12 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि जब धोखाधड़ी या पैसे की हेराफेरी का कोई आरोप न हो तो बैंक कर्ज वसूली के लिए दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी नहीं कर सकता।

अदालत ने उस कंपनी के पूर्व निदेशक के खिलाफ जारी एलओसी को खारिज कर दिया, जो कर्ज चुकाने में विफल रही और जिस पूर्व निदेशक ने कर्ज के लिए गारंटी दी थी।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एलओसी विदेश यात्रा करने के इच्छुक व्यक्ति के लिए एक बड़ी बाधा है। इसने कहा कि किसी व्यक्ति को बहुत ही मजबूर करने वाले कारणों के अलावा विदेश जाने के उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने 28 मई को पारित अपने फैसले में कहा, ‘‘इस न्यायालय की राय है कि कानून में उपलब्ध सभी उपायों का सहारा लेने के बाद बैंक उस व्यक्ति से कर्ज वसूली के लिए दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर एलओसी जारी नहीं कर सकता, जो अधिक भुगतान करने में असमर्थ हो और उसके खिलाफ ऋण धोखाधड़ी में शामिल होने या ऋण राशि के गबन का आरोप न हो।’’

अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही लंबित नहीं है और न ही उसके खिलाफ गबन में शामिल होने का कोई आरोप है।

याचिकाकर्ता कंपनी के निदेशकों में से एक था, जिसने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से प्राप्त 69 करोड़ रुपये के ऋण की गारंटी दी थी। बाद में उसने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और दूसरी संस्था में नौकरी करने लगा।

कंपनी के ऋण चुकाने में विफल रहने के बाद बैंक ने विभिन्न कानूनों के तहत उसके (निदेशक के) खिलाफ कार्यवाही शुरू की और एलओसी जारी करने का भी अनुरोध किया।

अदालत ने कहा कि यद्यपि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा करने के अधिकार की गारंटी दी गई है और इसे मनमाने एवं अवैध तरीके से नहीं छीना जा सकता है, लेकिन "अब बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां बैंक बिना किसी आपराधिक कार्यवाही शुरू किये पैसे वसूलने के उपाय के तौर पर लुकआउट सर्कुलर खोलने पर जोर दे रहे हैं"।

अदालत ने कहा कि केंद्र के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, एलओसी तब जारी किया जा सकता है जब किसी व्यक्ति की विदेश् रवानगी भारत की संप्रभुता या सुरक्षा या अखंडता या द्विपक्षीय संबंधों अथवा भारत के रणनीतिक और/या आर्थिक हितों के लिए हानिकारक हो।

अदालत ने कहा कि बैंक ऋण चूक के हर मामले में एलओसी का सहारा नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उपर्युक्त के मद्देनजर, याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को रद्द किया जाता है।’’

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