देश की खबरें | पाक सैन्य नेतृत्व की तरह भाजपा भी कश्मीर समस्या सुलझाने में दिलचस्पी नहीं रखती: महबूबा मुफ्ती
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू-कश्मीर की समस्या को एक ‘लाइलाज बीमारी’ करार देते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की तरह ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी इस समस्या के समाधान में दिलचस्पी नहीं रखती है।
जम्मू, 13 फरवरी जम्मू-कश्मीर की समस्या को एक ‘लाइलाज बीमारी’ करार देते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की तरह ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी इस समस्या के समाधान में दिलचस्पी नहीं रखती है।
मुफ्ती ने शांति के व्यापक हित में मुद्दे के समाधान की वकालत की और कहा कि अगस्त 2019 में क्षेत्र को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने से समस्या का समाधान नहीं हुआ है, बल्कि इससे जम्मू-कश्मीर के लोग नाखुश हो गए हैं।
महबूबा ने यहां पीडीपी मुख्यालय से पार्टी के सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए कहा, “जम्मू-कश्मीर की समस्या एक लाइलाज बीमारी की तरह है जिसका इलाज होना चाहिए। इसका इलाज कैसे होगा? जब आप, लोगों के जख्मों पर मरहम लगाएंगे और नियंत्रण रेखा पार मार्ग खोलेंगे, जिन्हें आपने (भाजपा सरकार ने 2019 में) बंद कर दिया है।”
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2019 में उत्तरी कश्मीर के सलामाबाद-उरी और पुंछ के चक्कन-दा-बाग में दो निर्दिष्ट बिंदुओं से नियंत्रण रेखा पार व्यापार और यात्रा को निलंबित कर दिया था। इसके माध्यम से भारत में “अवैध हथियारों, नशीले पदार्थों और नकली मुद्रा” के परिवहन की चिंताओं का हवाला दिया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) और (गृह मंत्री) अमित शाह कह रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में सब कुछ ठीक है, तो फिर (सीमा पार मार्ग) क्यों नहीं खोल रहे हैं। उन्हें यहां आकर खुद फर्क देखना चाहिए।”
हालांकि, महबूबा ने आरोप लगाया कि भाजपा देशभर में अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए जम्मू-कश्मीर की समस्या को जिंदा रखना चाहती है।
पीडीपी नेता ने कहा, “ जिस तरह पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान कश्मीर में अपना महत्व बनाए रखने के लिए माहौल को गर्म रखना चाहता है। ऐसा लगता है कि भाजपा भी कश्मीर समस्या का समाधान नहीं चाहती।”
महबूबा ने कहा, “मुफ्ती मोहम्मद सईद (महबूबा के पिता) कहा करते थे कि भाजपा एक राष्ट्रवादी पार्टी है क्योंकि इसके नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वह किया जो किसी और नेता ने नहीं किया। उन्होंने (वाजपेयी) जम्मू-कश्मीर में शांति और सौहार्द के वास्ते जनरल (परवेज़ मुशर्रफ) को बातचीत के लिए बुलाया।”
उन्होंने कहा, "अगर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तानी सेना को रास आता है, तो मुझे लगता है कि कहीं न कहीं भाजपा भी उम्मीद करती है कि वहां विस्फोट या गोलीबारी होगी और कोई शहीद होगा, ताकि वे हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा कर सकें।"
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए भाजपा की आलोचना करते हुए महबूबा ने कहा कि संवैधानिक प्रावधान डोगरा, कश्मीरी, गुज्जर, पहाड़ी और सिखों सहित जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सुरक्षा कवच की तरह था क्योंकि यह उनकी भूमि और नौकरियों की रक्षा कर रहा था।
महबूबा ने कहा, “ उन्होंने यह सुरक्षा कवच छीन लिया है और हमें असुरक्षित बना दिया है।”
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि उन्हें (भाजपा सरकार को) डर है कि जम्मू-कश्मीर में लोग खुश नहीं हैं तथा ज्वालामुखी बन रहा है और कभी भी फट सकता है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि किसी भी सैनिक की जान विस्फोट में न जाए, जैसे कि 11 फरवरी को अखनूर सेक्टर में एक कैप्टन सहित दो सैन्यकर्मियों की जान चली गई थी।
वहीं, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रविन्द्र रैना ने महबूबा मुफ्ती के बयान को "गैरजिम्मेदाराना और निंदनीय" बताया और उनसे माफी की मांग की।
रैना ने ‘पीटीआई-’ से कहा, "उनका बयान गैरजिम्मेदाराना, बेहद निंदनीय और विवादास्पद है। ऐसा लगता है कि उन्होंने जनता को गुमराह करने और खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए अलगाववाद की राह पर चलना शुरू कर दिया है।"
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