देश की खबरें | आईएएस अधिकारी की अंतर-काडर तबादले के लिये कानूनी जंग जारी रहेगी, न्यायालय ने पूर्व का आदेश वापस लिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार में ट्रांसपोर्ट माफिया को चुनौती देने वाले आईएएस अधिकारी को अंतर-काडर तबादले के लिये अपनी कानूनी जंग जारी रखनी पड़ेगी, क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपना फरवरी का आदेश वापस ले लिया। इस आदेश में न्यायालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के इस आश्वासन का संज्ञान लिया था कि इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर उचित कार्यवाही की जायेगी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात सितंबर बिहार में ट्रांसपोर्ट माफिया को चुनौती देने वाले आईएएस अधिकारी को अंतर-काडर तबादले के लिये अपनी कानूनी जंग जारी रखनी पड़ेगी, क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपना फरवरी का आदेश वापस ले लिया। इस आदेश में न्यायालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के इस आश्वासन का संज्ञान लिया था कि इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर उचित कार्यवाही की जायेगी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान सोमवार को अपना तीन फरवरी का आदेश वापस ले लिया। न्यायालय ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के आश्वासन के बाद इस आदेश के माध्यम से 2013 बैच के आईएएस अधिकारी जीतेन्द्र गुप्ता की याचिका का निस्तारण कर दिया था । मेहता ने आश्वासन दिया था कि इस अधिकारी को हरियाणा काडर में तैनात करने के बारे में तीन सप्ताह के भीतर उचित कार्यवाही की जायेगी।

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बाद में, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने तीन फरवरी का आदेश वापस लेने का अनुरोध करते हुये न्यायालय में एक आवेदन दायर किया था।

इस आवेदन पर सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल ने पीठ से कहा कि उन्होंने संबंधित प्राधिकारी से आवश्यक निर्देश लिये बगैर ही पहले बयान दे दिया था और उसे वापस लेने की अनुमति दी जाये।

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पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि संबंधित प्राधिकारी से आवश्यक निर्देश प्राप्त किये बगैर ही बयान दिया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें उस बयान को वापस लेने की अनुमति दी जाये और मामले को फिर से सुना जाये।’’

पीठ ने इस तथ्य का भी जिक्र किया कि तीन फरवरी का आदेश आईएएस अधिकारी की याचिका पर पहले दिन की सुनवाई के दौरान दिया गया था और उसी दिन नोटिस भी जारी किया गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी राय है कि आवेदक ने बयान वापस लेने के लिये पर्याप्त वजह बतायी हैं। तद्नुसार, हम तीन फरवरी, 2020 का आदेश ‘ याचिकाकर्ता की हरियाणा में तैनाती के बारे में आज से तीन सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी’ यह अंश वापस लिया जाता है। बयान रिकार्ड में शामिल किया गया। इस तथ्य के मद्देनजर विशेष अनुमति याचिका और अगर कोई अंतरिम आवेदन है, तो उसका निस्तारण्स किया जाता है।’’

शीर्ष अदालत ने गुप्ता की याचिका 15 सितंबर को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करते हुये कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

गुप्ता ने दिल्ली उचच न्यायालय के 24 दिसंबर, 2019 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी जिस पर न्यायालय ने तीन फरवरी को आदेश दिया था।

उच्च न्यायालय ने संबंधित प्राधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिये गुप्ता की याचिका खारिज कर दी थी। गुप्ता का कहना था कि संबंधित प्राधिकारी ने इस मामले में सुनाये गये उसके फैसले के निर्देशों का अनुपालन नहीं किया है।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पिछले साल जुलाई में केन्द्र को निर्देश दिया था कि गुप्ता का अंतर-काडर तबादला करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाये और इसे बिहार काडर से स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया जाये।

गुप्ता ने बिहार में ट्रांसपोर्ट माफिया से अपनी जान को कथित खतरा होने का दावा करते हुये हरियाणा काडर में स्थानांतरण का अनुरोध किया था।

इससे पहले, कैट ने भी केन्द्र को गुप्ता का अंतर-काडर स्थानांतरण करने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसे बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

गुप्ता को 2016 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया और पटना उच्च न्यायालय ने इस अधिकारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी थी।

अनूप

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