देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ दिल्ली में वामपंथियों, किसान समूहों का प्रदर्शन
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नयी दिल्ली, 24 फरवरी जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के 2020 में जारी आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए संघ शासित प्रदेश के किसान समूहों और वामपंथी नेताओं ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) और जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक (जेकेकेटी) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में समूहों ने भूमि कानून में हुए बदलावों को वापस लेने और अतिक्रमण विरोधी अभियान रोकने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधानों को समाप्त किए जाने से जुड़ी याचिकाएं अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं, लेकिन संघ शासित प्रदेश में कानूनों में बदलाव किया जाने लगा है।
येचुरी ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में कानूनों में बदलाव किया जा रहा है और सामान्य कामकाजी वर्ग, खास तौर से किसान इससे प्रभावित हो रहे हैं। अन्य राज्यों के लोगों को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने की अनुमति देने संबंधी कानून में बदलाव सही नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘1927 में महाराजा हरि सिंह ने बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने पर पाबंदी के लिए कानून लागू किया था। यह कानून सिर्फ जम्मू-कश्मीर में नहीं है, कई राज्यों में ऐसे कानून हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह कृषि भूमि को कॉरपोरेट को बेचने की साजिश है।’’
माकपा ने सवाल किया कि परिसीमन का काम पूरा होने के बावजूद संघ शासित प्रदेश में चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के लोगों का कोई प्रतिनिधि नहीं है, वे किसी के समक्ष अपनी समस्या नहीं रख सकते। पांच साल हो गए हैं, और उन्होंने अभी तक चुनाव नहीं कराए हैं।’’
जम्मू-कश्मीर से माकपा नेता मोहम्मद युसुफ तारिगामी ने कहा कि अतिक्रमण हटाने से पहले स्थानीय निकायों से कोई सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तुरंत बंद करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने संपत्ति कर लागू करने को लेकर प्रशासन की आलोचना भी की।
उन्होंने कहा, ‘‘वे कोई भूमाफिया नहीं हैं, अगर कोई सीमांत किसान सरकारी जमीन पर खेती कर रहा है, या छोटा मकान बना लिया है तो उसे खाली नहीं कराया जाना चाहिए।’’
तारिगामी ने सवाल किया कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं।
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