देश की खबरें | वाम दलों ने निजी इकाइयों को ट्रेनों के परिचालन की अनुमति देने को लेकर सरकार पर निशाना साधा

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नयी दिल्ली, दो जुलाई देश के प्रमुख वामपंथी दलों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने कई रेल मार्गों पर निजी इकाइयों को यात्री ट्रेनों के परिचालन की अनुमति देने के फैसले का विरोध करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह कदम ‘भारत की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के आधार को कमजोर करता है’ और ऐसे में इस जनविरोधी निर्णय को रद्द किया जाना चाहिए।

माकपा ने एक बयान में कहा कि रेलवे के ढांचे का उपयोग करके निजी क्षेत्र बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाएगा।

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उसने कहा, ‘‘भारतीय रेल हमारे देश को एक साथ जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण नेटवर्क है और यह करोड़ों लोगों को सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदान करता है। करोड़ों लोगों की जीविका रेल पर निर्भर है। ’’

माकपा ने कहा, ‘‘यह निजीकरण भारत की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के आधार को कमजोर करता है।’’

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भाकपा ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि सरकार सारी राष्ट्रीय संपत्तियों एवं संसाधनों को निजी क्षेत्र को सौंपने को उतावली है।

उसने कहा, ‘‘ कोयला, बैंक, रक्षा, तेल, बीमा, बिजली, दूरसंचार, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा का मोदी सरकार द्वारा निजीकरण किया जा रहा है। अब निजीकरण का ताजा निशाना रेलवे बनी है।’’

भाकपा ने दावा किया कि निजी क्षेत्र द्वारा ट्रेनों का परिचालन करने से यात्री किराये में भारी बढ़ोतरी होगी।

गौरतलब है कि रेलवे ने बुधवार को अपने नेटवर्क पर यात्री ट्रेनें चलाने के लिये निजी इकाइयों को अनुमति देने की योजना पर औपचारिक रूप से कदम उठाया। इसके तहत यात्री रेलगाड़ियों की आवाजाही को लेकर 109 मार्गों पर 151 आधुनिक ट्रेनों के जरिये परिचालन के लिए पात्रता अनुरोध आमंत्रित किए गये हैं।

रेलवे ने कहा कि इसमें निजी क्षेत्र से करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

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