कोलकाता, तीन अक्टूबर उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित समुदाय की एक महिला से कथित सामूहिक बलात्कार व उसकी मौत के मामले को लेकर कोलकाता में शनिवार को वाम दलों और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)और कांग्रेस के करीब 1,000 कार्यकर्ता दोपहर में मौलाली से एस्प्लेनेड की ओर बढ़े। उनके हाथों में तख्तियां थी, जिन पर ‘केंद्र की फासीवादी भाजपा (सरकार) और बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (सरकार) मुर्दाबाद’ तथा ‘लोकतंत्र का गला घोंटने वालों का मुर्दाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।
जब उन्होंने एस्प्लेनेड में बैरीकोड हटाने की कोशिश की, तब पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। वे प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के एक कार्यालय की ओर जाने का प्रयास कर रहे थे।
कार्यदावा ने दावा किया कि उनमें से कई को झड़प में चोटें लगी, हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया है।
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बाद में, उन्होंने एस्प्लेनेड चौराहे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पुतले फूंके।
एसएफआई नेता सुभजीत सरकार ने कहा, ‘‘ हमने लोकतांत्रिक शक्तियों पर हमले और देशभर में, खासकर उत्तरप्रदेश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने में विफल रहने को लेकर मोदी का पुतला फूंका। हम राज्य (पश्चिम बंगाल) में कानून व्यवस्था के चरमरा जाने और महिलाओं पर हमले बढ़ने को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख का भी पुतला फूंक रहे हैं।
गत 14 सितंबर को हाथरस जिले के एक गांव में 19 वर्षीय एक दलित महिला से चार लोगों ने कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया था। पीड़िता की हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां मंगलवार तड़के उसकी मौत हो गई थी, इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने रातोंरात (बुधवार तड़के) उसके शव का दाह-संस्कार कर दिया।
इस पूरे प्रकरण को लेकर राष्ट्रव्यापी रोष छाया हुआ है।
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