जरुरी जानकारी | बीते सप्ताह सरसों में सुधार, मूंगफली में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार द्वारा सरसों तेल में सस्ते आयातित तेलों की मिलावट रोकने के आदेश के बाद बीते सप्ताह दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में सरसों तेल तिलहन की कीमतों में तेजी का रुख बना रहा जिससे सरसों दाना सहित उसके तेल की कीमतों में सुधार दर्ज हुआ। दूसरी ओर सस्ते आयातित तेल की आवक बढ़ने और इससे स्थानीय मांग प्रभावित होने से मूंगफली तेल कीमतों में नरमी देखी गई।
नयी दिल्ली, 27 सितंबर सरकार द्वारा सरसों तेल में सस्ते आयातित तेलों की मिलावट रोकने के आदेश के बाद बीते सप्ताह दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में सरसों तेल तिलहन की कीमतों में तेजी का रुख बना रहा जिससे सरसों दाना सहित उसके तेल की कीमतों में सुधार दर्ज हुआ। दूसरी ओर सस्ते आयातित तेल की आवक बढ़ने और इससे स्थानीय मांग प्रभावित होने से मूंगफली तेल कीमतों में नरमी देखी गई।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया में पाम तेल का अत्यधिक मात्रा में स्टॉक जमा होने और उसकी तुलना में मांग कमजोर होने से कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में भी गिरावट दर्ज हुई। तिलहन फसलों की मांग आने से सोयाबीन दाना और लूज के भाव लाभ दर्शाते बंद हुए, जबकि सस्ते डीगम तेल के देश के बंदरगाहों पर बढ़ते स्टॉक के कारण सोयाबीन के सभी तेलों की कीमतों में गिरावट आई।
सस्ते आयातित तेल के मुकाबले स्थानीय मांग न होने से बिनौला तेल कीमतों में भी हानि दर्ज हुई।
सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताह सरकार ने सरसों में सस्ते आयातित तेलों की मिलावट पर पूर्ण रोक लगा दी है जो एक अक्टूबर, 2020 से प्रभावी है। खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने भी इस संबंध में दिशानिर्देश जारी करते हुए मिलावट किये जाने वाले तेल को बगैर मिश्रित तेल के रूप में निपटाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि पहले से चली आ रही छूट के कारण कुछ आयातक कंपनियां सस्ते आयातित तेलों का सरसों के साथ सम्मिश्रण करती थीं। अपनी ज्यादातर मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर करने वाले देश भारत में विदेश के सस्ते तेलों की भारी मात्रा में मिलावट की जाती थी।
यह भी पढ़े | आलू, प्याज, टमाटर के दाम में हुई गिरावट तो सबसे पहले से कर देगा अलर्ट ये Portal.
तेल कारोबार से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि ये आयातक कंपनियां आठ से 15 प्रतिशत सरसों तेल में आयातित सस्ते तेल की मिलावट करती थीं। मजेदार बात यह है कि मिलावट के बाद उसी सस्ते आयातित तेल की बिक्री महंगे दाम पर यानी सरसों के भाव पर की जा रही थी। लेकिन सरकार द्वारा समय रहते इसे रोकने से देश कें तिलहन किसानों के अलावा तेल उद्योग और उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है।
इसके अलावा इस फैसले से बंद पड़ी तेल मिलें चल पड़ेंगी, देश को विदेशी मुद्रा का खर्च बचेगा, रोजगार बढ़ेंगे और तिलहन किसानों को लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि सस्ते आयात के कारण जिन तिलहन किसानों को अपनी सरसों फसल के लिए लाभकारी दाम नहीं मिलते थे और उन्हें अपना स्टॉक सही कीमत मिलने के इंतजार में बचाना पड़ता था, उन्हें अब अपना उत्पाद बाजार में खपाने की चिंता से मुक्ति मिलेगी।
बाजार सूत्रों ने कहा कि देश के बाजारों में सूरजमुखी, मूंगफली न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिक रहे हैं। सरकार को इसके लिए कोई निदानात्मक उपाय करने होंगे। इसके अलावा बेपड़ता कारोबार, पहले से जमा भारी स्टॉक और आने वाले दिनों में उत्पादन और बढ़ने की संभावना के बीच पाम एवं पामोलीन तेलों के भाव भी गिरावट दर्शाते बंद हुए।
बाजार के जानकारों का कहना है कि देश को यदि तेल- तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है तो विदेशों से सस्ते आयात पर अंकुश लगाया जाना चाहिये और घरेलू तेल कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आयातित तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाना चाहिये। इसके अलावा घरेलू बाजार में तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बिकवाली बंद होनी चाहिये और विदेशों से बेपड़ता आयात के खेल को बंद किया जाना चाहिये जो बैंकों के पैसों पर अपने साख पत्र को चलाते रहने के लिए किया जाता है। इससे स्थानीय तिलहन उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होता है।
आलोच्य सप्ताह के दौरान घरेलू तेल-तिलहन बाजार में सरसों दाना (तिलहन फसल) पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 100 रुपये का सुधार दर्शाता 5,500-5,550 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। सरसों तेल (दादरी) 50 रुपये बढ़कर 10,850 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। सरसों पक्की और कच्ची घानी के तेल क्रमश: 15 रुपये और पांच रुपये के सुधार के साथ समीक्षाधीन सप्ताहांत में क्रमश: 1,695-1,845 रुपये और 1,815-1,925 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
दूसरी ओर सस्ते आयातित तेल के आगे मांग प्रभावित होने से मूंगफली दाना 35 रुपये की हानि के साथ 4,870-4,920 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। इसके अलाववा मूंगफली तेल गुजरात 250 रुपये की हानि के साथ 12,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ, जबकि मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड 30 रुपये की हानि के साथ 1,855-1,915 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
तिलहन फसलों की मांग आने से सोयाबीन दाना और लूज के भाव क्रमश: 10-10 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 3,780-3,805 रुपये और 3,630-3,680 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए। दूसरी ओर सस्ते आयातित तेल का आयात बढ़ने और मांग कमजोर होने के कारण सोयाबीन तेल (दिल्ली) 350 रुपये, सोयाबीन इंदौर 320 रुपये और सोयाबीन डीगम 300 रुपये की हानि दर्शाते क्रमश: 9,750 रुपये, 9,600 रुपये और 8,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
मामूली मांग के बावजूद बेपड़ता कारोबार के कारण सीपीओ दिल्ली, पामोलीन दिल्ली और पामोलीन एक्स-कांडला की कीमतें क्रमश: 430 रुपये, 500 रुपये और 500 रुपये की हानि के साथ क्रमश: 7,700 रुपये, 9,100 रुपये और 8,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुईं।
सस्ते आयात के कारण स्थानीय मांग प्रभावित होने से बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा) के भाव भी 200 रुपये की हानि के साथ 9,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
राजेश
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 27, 2020 10:51 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

