देश की खबरें | असम में परिसीमन संबंधित याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिये केन्द्र व राज्य को अंतिम मौका
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने असम में संसदीय और विधान सभा क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिये सोमवार को केन्द्र, राज्य सरकार और अन्य को ‘अंतिम अवसर’ प्रदान किया।
नयी दिल्ली, दो नवंबर उच्चतम न्यायालय ने असम में संसदीय और विधान सभा क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिये सोमवार को केन्द्र, राज्य सरकार और अन्य को ‘अंतिम अवसर’ प्रदान किया।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा कि अगर दो सप्ताह के भीतर जवाब नहीं दाखिल किये गये तो शीर्ष अदालत इस मामले में आगे कार्यवाही शुरू कर देगी।
एक याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में पहले नोटिस जारी किये गये थे लेकिन अभी तक जवाब दाखिल नहीं हुये हैं और परिसीमन की कवायद जारी है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम जवाब के बाद आपको सुनेंगे। अगर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल नहीं किया जाता है तो हम बगैर जवाब के ही आगे बढ़ेंगे।’’
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पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘प्रतिवादी/राज्यों की ओर से पेश अधिवक्ता के अनुरोध पर प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया जाता है। इसके बाद मामला सूचीबद्ध किया जाये।’’
कुछ याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में नगालैंड और मणिपुर में परिसीमन का मुद्दा उठाया है।
एक याचिका असम के दो निवासियों ने दायर की है। इसमें दावा किया गया है कि 2011 की जनगणना हो जाने के बावजूद 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की कवायद की जा रही है।
इसमें यह भी कहा गया है कि असम में विधान सभा और संसदीय सीटों के परिसीमन का काम 2021 की जनगणना पूरी होने तक टाला जाये ताकि इस कवायद के लिये ताजा आंकड़े उपलब्ध रहें।
शीर्ष अदालत इससे पहले इस साल 28 फरवरी का आदेश निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई करने पर सहमत हो गया था जो आठ फरवरी, 2008 की अधिसूचना से उलट थी। फरवरी, 2008 की अधिसूचना में असम के लिये परिसीमन की प्रक्रिया स्थगित कर दी गयी थी।
याचिका में कहा गया है कि असम में पहले परिसीमन की प्रक्रिया स्थगित करने का एक कारण राष्ट्रीय नागरिक पंजी तैयार किये जाने की कवायद थी
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