नयी दिल्ली, 24 जुलाई भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक हालिया अध्ययन में सभी प्रकार के कैंसर के इलाज में बड़े पैमाने पर रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल नहीं किए जाने का जिक्र किया गया है।
इसके अलावा, अध्ययन में कैंसर पीड़ितों की देखभाल के लिए आवश्यक मशीनों की कमी को पूरा करने की खातिर हस्तक्षेप की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
‘बीएमसी कैंसर’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि 28.5 प्रतिशत कैंसर रोगियों को रेडियोथेरेपी मिलती है, जो अनुमानित इष्टतम दर 58.4 प्रतिशत से कम है।
इसमें कहा गया है कि भारत में स्तन, सिर व गर्दन, फेफड़े और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से जुड़े 60 प्रतिशत मामलों में रेडियोथैरेपी की जरूरत होती है।
शोधकर्ताओं ने कहा, "हालांकि, देश में वर्तमान रेडियोथेरेपी उपयोग केवल 28.5 प्रतिशत है, जो आवश्यक स्तर की तुलना में आधे से भी कम है।"
आईसीएमआर-राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए ‘ऑस्ट्रेलियन कॉलेबोरेशन फॉर कैंसर आउटकम्स रिसर्च एंड इवैल्युएशन’ (सीसीओआरई) के डेटा का इस्तेमाल किया।
कैंसर के इलाज में रेडियोथेरेपी पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है। यह ट्यूमर के फैलाव को नियंत्रित करने, सर्जरी से पहले ट्यूमर के आकार को कम करने और उन्नत चरणों में दर्द को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अध्ययन में कहा गया है कि कैंसर देश में मौत का पांचवां प्रमुख कारण है, ऐसे में बीमारी की रोकथाम, निदान और उपचार में सुधार लाने पर तत्काल ध्यान देने की जरूरक है।
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