देश की खबरें | मेवाड़ के पूर्व राजघराने के 'मुखिया' बने लक्ष्यराज सिंह
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जयपुर, दो अप्रैल मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह को बुधवार को उनके कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने 'गद्दी' पर बिठाया।
उदयपुर के सिटी पैलेस में मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच यह भव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसके बाद सिंह ने अपने कुलगुरु समेत सभी संतों-महात्माओं का आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम सिटी पैलेस के नौ चौकी महल के राय आंगन में हुआ, जहां लक्ष्यराज सहित सभी लोग सफेद धवल वस्त्र पहनकर आए थे।
गद्दी (सिंहासन) की पूजा कर उस पर विराजमान होने के बाद लक्ष्यराज ने श्री एकलिंग नाथ जी को पुष्प अर्पित कर धोक लगाई।
उन्होंने धूणी दर्शन व अश्व पूजन सहित अन्य परंपराएं भी निभाईं और एकलिंगजी मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। इस अवसर पर यज्ञ भी हुआ।
इस अवसर पर प्रांगण शाही शुभचिंतकों, गणमान्य व्यक्तियों व अन्य हस्तियों से भरा हुआ था। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ओडिशा के उपमुख्यमंत्री और लक्ष्यराज के ससुर कनक वर्धन सिंह, जाने-माने कवि शैलेश लोढ़ा समेत कई लोग उदयपुर के सिटी पैलेस पहुंचे थे।
लक्ष्यराज के पिता अरविंद सिंह मेवाड़ का 16 मार्च को निधन हो गया था।
उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ही नवंबर 2024 में चित्तौड़गढ़ किले में 'समानांतर राज्याभिषेक' हुआ था। लक्ष्यराज के चचेरे भाई और भाजपा विधायक विश्वराज सिंह को मेवाड़ का 77वां 'महाराणा' घोषित किया गया, जिससे इस पूर्व राजपरिवार की विरासत के 'असली' उत्तराधिकारी को लेकर कड़वाहट पैदा हो गई।
विश्वराज सिंह और उनके समर्थकों को उदयपुर के सिटी पैलेस में प्रवेश से वंचित कर दिया गया तो हालात तनावपूर्ण हो गए। पैलेस के गेट पर दोनों पक्षों के समर्थक आमने सामने आ गए। उल्लेखनीय है कि 1984 में महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के निधन के बाद से ही उनके वंशजों के बीच उत्तराधिकार और महलनुमा परिसंपत्तियों, मंदिरों और विशाल ऐतिहासिक जायदाद पर कब्जे को लेकर खींचतान चल रही है।
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