देश की खबरें | लद्दाख झड़प: शहीद हुए पंजाब के दो जवानों का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
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पटियाला/गुरदासपुर, 18 जून लद्दाख के गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में शहीद हुए पंजाब के दो वीर जवानों का बृहस्पतिवार को उनके पैतृक गांवों में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

पंजाब के पटियाला जिले के सील गांव में नायब सुबेदार मंदीप सिंह की चिता को मुखाग्नि जोबनप्रीत सिंह (10) ने दी। गुरदासपुर के भोजराज गांव में 16 वर्षीय प्रभजोत सिंह ने अपने पिता नायब सूबेदार सतनाम सिंह का अंतिम संस्कार किया।

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अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को लद्दाख की गलवान घाटी में झड़प में शहीद हुए 20 सैनिकों में से चार पंजाब के थे। सिपाही गुरबिंदर सिंह (संगरूर) और गुरतेज सिंह (मनसा) के शव शुक्रवार को उनके गांवों में पहुंचाये जाने की उम्मीद है।

जैसे ही मंदीप सिंह का शव लाया गया, उनके बेटे जोबनप्रीत सिंह, 15 वर्षीय बेटी महकप्रीत कौर, पत्नी गुरदीप कौर और मां शकुंतला ने उन्हें सलामी दी।

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उनके पैतृक सील गांव में उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी।

तिरंगे में लिपटे 39 वर्षीय मंदीप सिंह के पार्थिव शरीर को जब उनके गांव लाया गया, तो ‘शहीद अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे हवा में गूंज उठे। पूरा माहौल गमगीन था।

तिरंगा पकड़े हुए ग्रामीणों, विशेष रूप से युवाओं को सैन्य वाहन पर पुष्पवर्षा करते देखा गया, जिसमें सैनिक के पार्थिव शरीर को लाया गया था।

पंजाब के मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और अकाली विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा, सेना, पुलिस और नगर निकाय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मंदीप को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

1997 में सेना में शामिल हुए मंदीप सिंह ने एक महीने की छुट्टी के बाद लगभग दो हफ्ते पहले ही अपनी यूनिट में वापस रिपोर्ट की थी।

गुरदासपुर जिले के नायब सूबेदार सतनाम सिंह के गाँव में भी दिल तोड़ देने वाले दृश्य देखने को मिले।

उनकी पत्नी जसविंदर कौर, बेटी संदीप कौर (17), बेटे प्रभजोत सिंह (16), मां जसबीर कौर और पिता जागीर सिंह सहित परिवार के सदस्य गम में डूबे हुए थे।

परिवार के घर पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

पार्थिव शरीर को लाए जाने से पहले, जसबीर कौर और जसविंदर कौर ने कहा कि उन्हें राष्ट्र के लिए सतनाम सिंह के बलिदान पर गर्व है।

उनकी मां ने कहा कि सतनाम सिंह (41) हमेशा से वर्दी पहनना और राइफल रखना पसंद करते थे।

एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने चीन के लिए सबसे कठोर सजा की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ एक माँ नहीं, बल्कि कई माँ रो रही हैं।’’

सैनिक के बेटे प्रभजोत सिंह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, अन्य राजनेताओं और सशस्त्र बलों, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सैनिक को श्रद्धांजलि दी। सतनाम सिंह 1995 में सेना में शामिल हुए थे।

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