देश की खबरें | कोविड का ज्यादा खतरनाक स्वरूप, अपर्याप्त आधारभूत संरचना है ज्यादा मौतों की वजह : विशेषज्ञ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस का ज्यादा खतरनाक स्वरूप, गंभीर रूप से बीमार संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए अपर्याप्त आधारभूत संरचना और आवश्यक दवाओं की जमाखोरी आदि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महामारी की दूसरी लहर से हो रही ज्यादा मौतों की वजह हैं।
नयी दिल्ली, चार मई विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस का ज्यादा खतरनाक स्वरूप, गंभीर रूप से बीमार संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए अपर्याप्त आधारभूत संरचना और आवश्यक दवाओं की जमाखोरी आदि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महामारी की दूसरी लहर से हो रही ज्यादा मौतों की वजह हैं।
गौरतलब है कि सोमवार को राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण से रिकॉर्ड 448 लोगों की मौत हुई है।
उनका यह भी कहना है कि संक्रमण से मरने वालों की संख्या इससे भी कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई मरीज बिस्तर नहीं मिलने के कारण अस्पतालों के बाहर दम तोड़ रहे हैं।
सफदरजंग अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसिन के प्रमुख डॉक्टर जुगल किशोर ने बताया कि गंभीर और नाजुक स्थिति वाले मरीजों के इलाज के लिए ‘‘अपर्याप्त आधारभूत संरचना’’ के कारण ज्यादा लोगों की मौत हो रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ इतनी मौतें वायरस के कारण नहीं हो रही है, यह अपर्याप्त संसाधनों और सुविधाओं का नतीजा है। यह मुख्य कारण है।’’
डॉक्टर किशोर ने कहा कि गंभीर/नाजुक स्थिति वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन उनके लिए बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं। कई मरीज अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में, कई बिस्तर ना मिलने के कारण अस्पतालों के बाहर तो कई ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से बीमार मरीज आईसीयू या ऑक्सीजन सपोर्ट पर 10 से 20 दिन गुजारता है। ऐसे में इतने दिनों तक बिस्तर भरा रहता है, जबकि गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संख्या रोज-रोज बढ़ रही है।
गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज में काम आने वाली जरूरी दवाओं की कालाबाजारी और जमाखोरी भी इसके कारण हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे लोगों को ये दवाएं सीमित मात्रा में मिल रही हैं।’’
तुगलकाबाद इंडस्ट्रीयल एरिया में स्थित बत्रा अस्पताल के कार्यकारी निदेशक सुधांशु बंकाटा ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार मरीज की संक्रमित होने के 14-15 दिन बाद बेहद संकट का समय होता है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में अगर आज ज्यादा मामले आए हैं, तो 14-15 दिन मौत के सबसे ज्यादा मामले होंगे।’’
उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज घर पर ही हो रहा है क्योंकि अस्पतालों में बिस्तर भरे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कई मामलों में ऑक्सीजन के हाई फ्लो की जरुरत होती है जो सिर्फ अस्पताल में दिया जा सकता है, घरों में सांद्रक और सिलेंडर की मदद से संभव नहीं है। ऐसे में जबतक बिस्तर उपलब्ध होता है, उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी होती है।’’
जयपुर गोल्डन अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर डी. के. बलुजा ने बताया, ‘‘(संक्रमितों की) संख्या बहुत ज्यादा है। संक्रमण के नए मामले 8,000 से बढ़कर 25,000 हो गए हैं। ऐसे में मरने वालों की संख्या भी तीन गुना बढ़ेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आपके पास उपलब्ध उपकरण, मानव संसाधन, सबकुछ ऐसी स्थिति में धराशायी हो जाते हैं। जिस तरह से दबाव बढ़ रहा है, आपकी क्षमता उसके साथ कदम से कदम नहीं मिला पा रही है।’’
महामारी की शुरुआत से अभी तक दिल्ली में कोविड-19 से 17,414 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 5,050 से ज्यादा लोगों की मौत पिछले दो सप्ताह में हुई है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2021 08:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

