कांग्रेस सदस्य ने दावा किया कि सरकार विपक्ष के सुझाव की उपेक्षा करती है।
माकपा के ए एम आरिफ ने केरल में कोरोना संकट के खिलाफ उठाए गए कदमों का उल्लेख किया और दावा किया कि केंद्र की ओर से बिना तैयारी के लॉकडाउन लगाने के कारण स्थिति खराब हुई।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी ने कहा कि बिना तैयारी के लॉकडाउन लगाया गया जिससे गरीब तबका मुसीबत में आ गया।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग पहले से ही लॉकडाउन में थे और जब कोरोना वायरस संकट के कारण लॉकडाउन लगाया गया तो केंद्रशासित प्रदेश के बहुत सारे लोग दूसरे राज्यों में फंस गए।
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तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) के जयदेव गल्ला ने कहा कि सरकार ने जो आर्थिक पैकेज घोषित किया उससे उद्योग जगत को कोई फायदा नहीं हुआ।
आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा कि सरकार के एक मंत्री ने तब्लीगी जमात को ‘तालिबानी जमात’ कहा और बंबई उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद अब मंत्री को माफी मांगनी चाहिए।
अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल ने कहा कि बिना लक्षण वाले मरीजों का पता लगाने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने कहा कि देश में कुछ लोगों ने कोरोना वायरस को हिंदू-मुसलमान का रंग दे दिया जो पूरी तरह अनुचित है।
भाजपा की लॉकेट चटर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक दृष्टिकोण की बदौलत ही इस आपदा को अवसर में बदला गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस से जुड़े आंकड़े छिपाए गए।
निर्दलीय मोहन डेलकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने समय रहते कदम उठाए जिस कारण कोरोना संकट नियंत्रण से बाहर नहीं हुआ।
भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि इस कोरोना संकट में सबने मिलकर काम किया। विचारधारा, धर्म, जाति और क्षेत्र के बंधन टूट गए। हैदराबाद में आरएसएस के लोगों ने मदद की तो एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी लोगों की मदद की।
उन्होंने कहा कि देश को यह बताने की जरूरत है कि कोरोना वायरस संकट के समय कैसे सबने मिलकर काम किया।
कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने प्रवासी श्रमिकों के लिये एक अलग मंत्रालय बनाने की मांग की ।
उन्होंने सरकार से पूछा कि कोविड-19 का टीका कब तक बन कर तैयार होगा।
कांग्रेस के दीपक बैज, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल, एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल और कई अन्य सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
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