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कोविड-19: राज्यों में अस्थाई सामुदायिक रसोई बनाने के लिये न्यायालय में याचिका

यह आवेदन न्यायालय में पहले से ही लंबित एक जनहित याचिका में दायर किया है। यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता ए धवन, ईशान धवन और कुंजन सिंह ने दायर कर रखी है जिसमें कुपोषण और भूख की समस्या से निबटने के लिये देश भर में सामुदायिक रसाई स्थापित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

कोविड-19: राज्यों में अस्थाई सामुदायिक रसोई बनाने के लिये न्यायालय में याचिका
जमात

नयी दिल्ली, 23 अप्रैल कोरोना वायरस संकट के दौरान भूख के कारण लोगों को मौत से बचाने के लिये सभी राज्यों में ब्लाक स्तर पर अस्थाई सामुदायिक रसोई स्थापित करने के लिये उच्चतम न्यायालय में एक आवेदन दायर किया गया है।

यह आवेदन न्यायालय में पहले से ही लंबित एक जनहित याचिका में दायर किया है। यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता ए धवन, ईशान धवन और कुंजन सिंह ने दायर कर रखी है जिसमें कुपोषण और भूख की समस्या से निबटने के लिये देश भर में सामुदायिक रसाई स्थापित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

अधिवक्ता फुजैल अहमद अयूबी और आशिमा मंडला के माध्यम से न्यायालय में दायर इस आवेदन में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, झारखंड और दिल्ली में सरकार द्वारा पोषित सामुदायिक रसोई का हवाला दिया गया है, जिनमें साफ-सफाई के साथ लोगों को रियायती दाम पर भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

आवेदन में कहा गया है कि इन सामुदायिक रसोई में कार्यरत कर्मचारियों को रोजगार मिल रहा है, जो मौजूदा आर्थिक हालत में एक अतिरिक्त लाभ है, क्योंकि इस समय बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है और यह भूख तथा कुपोषण के चक्र को बढ़ावा दे रही है।

आवेदन में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था में आये ठहराव से पैदा हुए भोजन के अभूतपूर्व संकट पर काबू पाने के प्रयास में ही पहले से लंबित मामले में हस्तक्षेप की अनुमति चाहता है। आवेदन में कहा गया है कि मौजूदा खाद्य संकट अभूतपूर्व और अनिश्चितकालीन है और इस तरह से यह संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त भोजन के मौलिक अधिकार का अतिक्रमण कर रहा है।

आवेदन में कहा गया है कि ‘सामान्य समय में भी’ हमारे देश में करीब 19 करोड़ लोग भूखे पेट सोने के लिये मजबूर हैं और लॉकडाउन के दौर में कहीं ज्यादा बड़ी आबादी के सामने भूख का खतरा है जिनके लिये भोजन खरीद पाना उनकी माली हैसियत से बाहर है।

इसमें आगे कहा गया है कि खबरों के अनुसार 13 अप्रैल तक देश में लॉकडाउन के दौरान 195 व्यक्तियों की मृत्यु होने का अनुमान है जिसमे से 53 मौतें भूख, स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने से इंकार या फिर आजीविका या भोजन नहीं मिलने की वजह से आत्महत्या के कारण हुयीं।

शीर्ष अदालत ने मुख्य जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान छह राज्यों पर पांच लाख रुपए का अर्थदंड लगाया था क्योंकि वे अपने यहां सामुदायिक रसोई स्थापित करने से संबंधित इस मामले मे जवाब दाखिल करने में विफल रहे थे। इन राज्यों में महाराष्ट्र, ओडिशा, गोवा, सिक्किम, दिल्ली, केन्द्र शासित लद्दाख भी शामिल थे।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 23, 2020 10:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).