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कोविड-19 : भारत में 20 लाख से अधिक आरटी-पीसीआर जांच किए गए

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधिकारियों ने बताया कि देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 81,970 तक पहुंच गई है।

कोविड-19 : भारत में 20 लाख से अधिक आरटी-पीसीआर जांच किए गए
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नयी दिल्ली, 15 मई भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण का पता लगाने के लिए की जाने वाली आरटी-पीसीआर जांच की संख्या शुक्रवार को 20 लाख के पार हो गई।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधिकारियों ने बताया कि देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 81,970 तक पहुंच गई है।

आईसीएमआर में शोध प्रबंधन, नीति योजना और संप्रेषण विभाग के प्रमुख डॉ.रजनीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार सुबह नौ बजे तक 20 लाख 39,952 नमूनों की जांच की जा चुकी है।

अधिकारियों के मुताबिक कोविड-19 की जांच में गत दो महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब रोजाना एक लाख जांच की क्षमता हो गई है।

श्रीवास्तव ने बताया, ‘‘ मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने और घरेलू उत्पादकों के कोविड-19 जांच किट को सत्यापित करने की सुविधा देने के लिए आईसीएमआर के सत्यापन केंद्रों और प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाकर पांच से 14 कर दी गई है।’’

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के शुरू में पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणुविज्ञान संस्थान और 100 प्रयोगशालाओं से आरटी-पीसीआर जांच की सुविधा थी जिसे बढ़ाकर 360 सरकारी और 147 निजी प्रयोगशालाओं तक किया गया है।

आईसीएमआर के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 31 मार्च तक 47,852 नमूनों की जांच की गई थी जबकि 30 अप्रैल तक 9,02,654 नमूने की जांच की गई थी। वहीं एक मई से 15 मई सुबह आठ बजे तक 11,37,298 नमूनों की जांच की गई।

उल्लेखनीय है कि आरटी-पीसीआर में गले और नाक से नमूने लेकर जांच की जाती है और अभी तक संक्रमण का पता लगाने के लिए यह सबसे प्रमाणिक जांच है।

शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान निकाय ने कहा कि वायरस का शुरुआत में पता लगाना पहचान और पृथक करने की सबसे बेहतर रणनीति है।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘कोविड-19 की जांच का सबसे बेहतर तरीका आरटी-पीसीआर जांच है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बृहस्पतिवार को 6,000 जांच मशीन देश को समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि पहला पूरी तरह से स्वचालित और वास्तविक समय में काम करने वाले पीसीआर जांच मशीन सरकार ने खरीदी है और इसे राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में स्थापित किया गया है। यह मशीन एक दिन में 1200 नमूनों की जांच कर सकती है जिससे क्षमता बढ़ेगी और रिपोर्ट आने में लगने वाला समय भी कम होगा।

इस मशीन के इस्तेमाल में न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत होती है और व्यक्ति दूर से रहकर निगरानी कर सकता है।

इस बीच, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने सफलतापूर्वक पहला स्वदेशी आईजी एलिसा जांच किट विकसित किया है जिसे ‘कोविड कवच एलिसा’ नाम दिया गया है। इससे कोरोना वायरस से संक्रमण का पता लगाने के लिए शरीर में एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है और यह निगरानी में अहम है। इस किट में एक बार में 90 नमूनों की जांच की जा सकती है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 09:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).