देश की खबरें | कोविड-19 लॉकडाउन के कारण वैश्विक उत्सर्जन में अभूतपूर्व कमी आई है : अध्ययन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से वैश्विक स्तर पर कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में अभूतपूर्व कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने नये अध्ययन में पाया गया कि यह कमी 2008 के वित्त्तीय संकट, 1979 के तेल संकट या विश्वयुद्ध द्वितीय के दौरान उत्सर्जन में आई कमी से भी ज्यादा है।

पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित शोध में पाया गया कि इस वर्ष के पहले छह महीने के दौरान 2019 के इसी अवधि की तुलना में 8.8 फीसदी कम कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ और कुल कमी 1551 मिलियन टन हुआ है।

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शोध में कोविड-19 का वैश्विक स्तर पर ऊर्जा उपभोग पर हुए असर को भी उजागर किया गया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि महामारी के बाद वैश्विक तापमान को स्थिर करने के लिए मूलभूत कदम उठाए जा सकते हैं।

चीन के शिंगुआ विश्वविद्यालय के झू लियू ने कहा, ‘‘हमारा शोध इसलिए भी अलग है कि इसमें वास्तविक आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है।’’

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लियू ने कहा, ‘‘कार्बन निगरानी शोध पहल की तरफ से जुटाए गए रोजाना आंकड़ों पर गौर कर हमें ज्यादा तेज और ज्यादा सटीक जानकारी मिली। इसमें हर देश में लॉकडाउन लगाए जाने के समय के दौरान आए उत्सर्जन में कमी का आंकड़ा शामिल किया गया है।’’

शोधकर्ताओं ने पाया कि अप्रैल में जब कोरोना वायरस के संक्रमण का पहले दौर चरम पर था और जब अधिकतर बड़े देशों ने लॉकडाउन लगाया था तब उत्सर्जन में 16.9 फीसदी की कमी आई थी।

उन्होंने कहा कि विभिन्न महामारियों के दौरान लॉकडाउन लगाने से उत्सर्जन में कमी आती है जिन्हें आम तौर पर क्रिसमस या चीन के स्प्रिंग त्योहार की छुट्टियों के दौरान अल्पावधि आधार पर देखा जाता है।

अध्ययन में यह भी दिखाया गया है कि दुनिया के किस हिस्से की अर्थव्यवस्था पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है।

कम्मेन ने कहा, ‘‘घर से काम करने की बाध्यता, परिवहन से कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में पूरी दुनिया में 40 फीसदी कमी आई। इसके अलावा ऊर्जा और उद्योग क्षेत्रों में क्रमश: 22 और 17 फीसदी की कमी आई है।’’

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