कोच्चि, आठ मार्च केरल उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष नये साल की पूर्व संध्या पर जश्न मनाने के लिए रुपये देने से इनकार करने के लिए मां पर कई बार चाकू से हमला करने वाले आरोपी बेटे को जमानत दे दी।
महिला ने अदालत से कहा था कि वह अपने बेटे को जेल में सड़ते हुए नहीं देख सकती है।
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि वह ‘मां की किस्मत और दर्द’ को देखते हुए जमानत देने के लिए ‘मजबूर’ हैं।
इसके साथ ही अदालत ने कहा, “हमारे देश के युवाओं की मानसिक स्थिति आश्चर्यजनक और परेशान करने वाली है।”
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा, “नव वर्ष की पूर्व संध्या पर जश्न मनाने के लिए पैसे न देने पर याचिकाकर्ता (बेटे) ने अपनी ही मां पर हमला कर उसे गंभीर चोट पहुंचायी। अब मां ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि उसे (आरोपी बेटे को) जमानत देने पर कोई आपत्ति नहीं है।”
अदालत ने कहा, “मुझे यकीन है कि महिला के शरीर पर लगे घाव भले ही ठीक न हुए हों, लेकिन बेटे के प्रति उसका प्यार घावों पर हावी हो गया है। मां की किस्मत और दर्द को देखते हुए मैं याचिकाकर्ता को जमानत देने के लिए मजबूर हूं। एक मां का अपने बेटे के प्रति प्यार गुलाब की तरह होता है, जो हमेशा खिलता रहेगा।”
अदालत ने शुक्रवार को जमानत देते हुए कहा कि समाज और माता-पिता को युवा पीढ़ी पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके रिश्ते अच्छे लोगों के साथ हों।
आरोपी को एक जनवरी को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 118 (हथियार से गंभीर चोट पहुंचाना) और 109 (हत्या का प्रयास) के तहत अपराध के लिए मामला दर्ज किया गया।
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