कोच्चि, 15 जून केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह ब्रह्मपुरम में नगर निगम के ठोस कचरे के ‘अनधिकृत प्रबंधन’ के मद्देनजर इस अपशिष्ट स्थल के पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों पर पड़ने वाले सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करे।
उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को एर्नाकुलम के जिला अधिकारी को इस संबंध में अध्ययन करने और उसके समक्ष एक रिपोर्ट पेश करने का आदेश देने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में ब्रह्मपुर अपशिष्ट स्थल के 500 मीटर, दो किलोमीटर और पांच किलोमीटर के दायरे में रह रहे लोगों की सेहत पर पड़ने वाले असर का ब्योरा शामिल होना चाहिए।
उसने कहा, “यह अध्ययन बिना किसी क्रम के लिए गये नमूनों के साथ किया जा सकता है, जिसका निर्धारण जिला प्रशासन करेगा।”
केरल उच्च न्यायालय ने विभिन्न निवासी कल्याण संघ द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया, जिसमें स्थानीय निकायों को मानसून के दौरान जल निकायों में अपशिष्ट प्रवाह को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने का आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ब्रह्मपुरम में स्थानीय निकायों द्वारा उठाए गए ऐसे किसी भी कदम को अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है, जिससे वहां लोगों के लिए रहने की स्थिति और खराब हो सकती है।
उसने कहा कि अदालत लोगों की शिकायतों पर विचार करने के बाद आवश्यक आदेश पारित करेगी।
उच्च न्यायालय ने आठ जून को पारित आदेश में यह भी कहा कि ब्रह्मपुरम में एजेंसियों द्वारा जहां भी नगर निगम का ठोस कचरा डाला जाता है, वहां कचरे के निस्तारण से पहले उसे रखने के लिए 15 दिन के भीतर अस्थायी शेड बनाए जाने चाहिए।
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