देश की खबरें | केरल उच्च न्यायालय ने एशियानेट के पत्रकारों के खिलाफ दर्ज पॉक्सो और फर्जीवाड़ा का मुकदमा रद्द किया

कोच्चि, 11 अप्रैल केरल उच्च न्यायालय ने मलयालम समाचार चैनल एशियानेट के छह पत्रकारों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामला शुक्रवार को खारिज कर दिया।

इन पत्रकारों पर दो साल पहले मादक पदार्थों के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों पर आयोजित एक कार्यक्रम में यौन उत्पीड़न की शिकार नाबालिग लड़की की पहचान कथित रूप से उजागर करने का आरोप था।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि चैनल के पत्रकारों ने ‘‘नारकोटिक्स एक गंदा कारोबार है’’ कार्यक्रम का प्रसारण करके राज्य सरकार की छवि को खराब करने की साजिश रची थी।

लोक अभियोजक ने दलील दी कि आरोपियों ने यौन उत्पीड़न की शिकार नाबालिग लड़की की पहचान कार्यक्रम में उसकी आवाज का इस्तेमाल करके उजागर की, एवं एक आरोपी पत्रकार की नाबालिग बेटी का इस्तेमाल पीड़िता के नाट्य रूपांतर में किया और समाचार रिपोर्ट के वीडियो के साथ छेड़छाड़ की और इस प्रकार, भारतीय दंड संहिता, किशोर न्याय अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत विभिन्न अपराध किए।

न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने नाट्य रूपांतर के पीछे मंशा होने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि पत्रकारों ने पीड़िता की पहचान की रक्षा करने के लिए चेहरा बदल दिया था।

अदालत ने कहा कि कार्यक्रम का वीडियो देखने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि चैनल का पीड़िता की पहचान उजागर करने का कोई इरादा था या उसने ऐसा किया है, इसलिए पॉक्सो अधिनियम के तहत कोई अपराध नहीं बनता।

अदालत ने फैसले में कहा कि कार्यक्रम के लिए पीड़िता की आवाज का उपयोग करना भारतीय दंड संहिता के तहत जालसाजी का अपराध नहीं माना जाएगा, क्योंकि इसका उद्देश्य जनता या किसी व्यक्ति को नुकसान या चोट पहुंचाना नहीं था।

एकल पीठ ने कहा, ‘‘इस कार्यक्रम का उद्देश्य केरल में युवाओं में मादक पदार्थों की बढ़ती लत के बारे में जनता को जागरूक करना था।’’

न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने कहा कि कार्यक्रम को देखने के बाद उनकी राय है कि यह ‘‘एक लाभदायक वीडियो’’ है जिसका उद्देश्य ‘‘लोगों को पुलिस थानों और आबकारी कार्यालयों के आसपास के क्षेत्रों में भी मादक पदार्थों की उपलब्धता के बारे में सचेत करना’’ है।

अदालत ने कहा, ‘‘ मादक पदार्थ की समस्या को रोकने और युवाओं को इससे होने वाले नुकसान से बचाने के किसी भी प्रयास को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और इसलिए चैनल सराहना का हकदार है।’’

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