तिरुवनंतपुरम, एक फरवरी कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने बुधवार को केरल विधानसभा में आरोप लगाया कि राज्य में खाद्य विषाक्तता से संबंधित मौतों का कारण वामपंथी सरकार की ‘अक्षमता और कुप्रबंधन’ है।
राज्य में खाद्य विषाक्तता की घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए विपक्ष ने दावा किया कि हाल की घटनाओं से संकेत मिलता है कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने में पूरी तरह विफल रही है।
राज्य सरकार द्वारा आरोपों का खंडन किया गया और स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि 2016 में एलडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद से निरीक्षणों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल अकेले 50,000 से अधिक निरीक्षण किए गए थे और राज्य सरकार अब भोजनालयों के कर्मचारियों के लिए ‘हेल्थ कार्ड’ जैसे कड़े कदम उठा रही है। ‘हेल्थ कार्ड’ यह प्रमाणित करता है कि वे स्वस्थ हैं और संक्रामक रोगों से मुक्त हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक तिरुवंचूर राधाकृष्णन द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने सदन में कहा, “स्वास्थ्य कार्ड 16 फरवरी से अनिवार्य होगा और इसके अलावा राज्य सरकार ने एक फरवरी से प्रभावी रूप से ‘बेस्ट बिफोर लेबल’ के बिना खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
राधाकृष्णन ने सदन में दावा किया कि खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग समन्वित तरीके से काम करने के बजाय इस मुद्दे से निपटने के लिए अपने अलग तरीके अपना रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यूडीएफ शासन के दौरान खाद्य सुरक्षा में केरल देश में नंबर एक था और 2022 में यह छठें स्थान पर खिसक गया था।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया, “काफी मौतें हुई हैं। इसका कारण खाद्य सुरक्षा विभाग का कुप्रबंधन और अक्षमता है। जनता भी इसे देखती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मिलावटी डेयरी उत्पाद, जैसे दूध और उपभोग अवधि की समयसीमा बीतने के बाद या सड़ा हुआ मांस स्वतंत्र रूप से अन्य राज्यों से केरल में प्रवेश कर रहे थे, जो सीमाओं पर जांच की कमी का संकेत देता है।
इसके अलावा राज्य में केवल तीन एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं हैं जिससे एकत्र किए गए नमूनों के परीक्षण में देरी होती है और उचित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं। ऐसे में आरोपी व्यक्ति मुक्त हो जाते हैं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि खाद्य सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन से संबंधित हजारों मामले अदालतों में लंबित हैं और पर्याप्त प्रयोगशालाओं की कमी के कारण परीक्षण के परिणामों में देरी के कारण भी आरोपी बिना किसी सजा के छूट जाते हैं।
जॉर्ज ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता द्वारा उठाई गई अभियोजन संबंधी चिंता को स्वीकार किया और कहा कि इसका हल करने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त कार्यालय में एक समर्पित विधि अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
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