देश की खबरें | शराब नीति पर केरल सरकार ने अभी तक कोई विचार-विमर्श शुरू नहीं किया हैः मंत्री राजेश

तिरुवनंतपुरम, 24 मई केरल के आबकारी मंत्री एम बी राजेश ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने शराब नीति के संबंध में कोई विचार-विमर्श शुरू नहीं किया है।

राज्य सरकार द्वारा ‘ड्राई डे’ के मानदंडों को वापस लेने की खबरों के बीच मंत्री ने यह टिप्पणी की।

विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार पर बार संचालकों को लाभ पहुंचाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। हालांकि, राज्य सरकार ने दावा किया कि उसने अभी तक अपनी शराब नीति के संबंध में कोई विचार-विमर्श नहीं किया है।

केरल में महीने का पहला दिन ‘ड्राई डे’ होता है जब राज्य में शराब नहीं बेची जाती है। टीवी चैनलों पर प्रसारित एक ‘ऑडियो क्लिप’ में बार संघ के एक सदस्य को कथित तौर पर अन्य सदस्यों से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि अपने पक्ष में शराब नीति बनवाने के लिए पैसे देने होंगे।

‘ऑडियो क्लिप’ सामने आने के बाद यूडीएफ ने आरोप लगाया कि राज्य की वामपंथी सरकार बार संचालकों से उनके फायदे वाली शराब नीति बनाने का वादा करके 20 करोड़ रुपये इकट्ठा करने का प्रयास कर रही है। यूडीएफ ने मामले में आबकारी मंत्री राजेश के इस्तीफे की भी मांग की।

विपक्षी दलों के आरोपों और मांग को खारिज करते हुए राजेश ने कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक शराब नीति के संबंध में कोई विचार-विमर्श नहीं किया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने दावा किया कि वाम मोर्चा या राज्य सरकार द्वारा शराब नीति के संबंध में कोई चर्चा नहीं की गई है।

गोविंदन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कुछ अधिकारी यह तय नहीं करते कि राज्य की शराब नीति क्या होनी चाहिए। यह निर्णय पहले पार्टी स्तर पर, फिर एलडीएफ और फिर सरकार द्वारा लिया जाता है।’’

इससे पहले, ‘ऑडियो क्लिप’ का हवाला देते हुए आबकारी मंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयासों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसे कृत्यों को बढ़ावा नहीं देंगे।’’

राज्य में आईटी पार्क में बार खोले जाने की खबरों के संबंध में राजेश ने कहा कि यह प्रस्ताव पहले की शराब नीति का हिस्सा था और इसे विधानसभा की विषय संबंधी समिति ने मंजूरी दे दी है।

दूसरी तरफ, विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि राज्य की वामपंथी सरकार राज्य के 800 से अधिक बार से उनके फायदे वाली शराब नीति बनाने का वादा करके 20 करोड़ रुपये इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कथित ‘ऑडियो क्लिप’ सरकार के ‘घोर भ्रष्टाचार’ का सबूत है। उन्होंने मंत्री राजेश के इस्तीफे की मांग की।

सतीशन ने आरोप लगाया कि एलडीएफ द्वारा सत्ता में आने के बाद राज्य में बार की संख्या बढ़ाई गई और शराब की बिक्री में वृद्धि हुई, लेकिन बार से कर संग्रह कम हो गया।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा जीएसटी विभाग द्वारा बार का कोई निरीक्षण नहीं करने के कारण हुआ। मैंने राज्य विधानसभा में कहा था कि सरकार ठीक से कर वसूली नहीं कर रही है।’’

सतीशन ने कहा कि यूडीएफ हमेशा ‘ड्राई डे’ नियम को वापस लेने के खिलाफ रहा है।

इस बीच, ‘फेडरेशन ऑफ केरल होटल्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष वी सुनील कुमार ने इस बात से इनकार किया कि शराब नीति को प्रभावित करने के लिए सदस्यों से कोई पैसा लिया गया था।

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि टीवी चैनलों पर प्रसारित क्लिप में कथित रूप से जिस व्यक्ति की आवाज है, उसे पहले ही एसोसिएशन से निलंबित कर दिया गया था।

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