देश की खबरें | केरल सरकार ने दसवीं कक्षा की पुस्तकों से आवर्त सारिणी व अन्य अध्याय हटाने की निंदा की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा दसवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से आवर्त सारिणी (पीरियोडिक टेबल) तथा ‘लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां’ पर आधारित अध्यायों को हटाये जाने की आलोचना की है और कहा कि यह लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को चुनौती देने जैसा है।
तिरुवनंतपुरम, तीन जून केरल सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा दसवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से आवर्त सारिणी (पीरियोडिक टेबल) तथा ‘लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां’ पर आधारित अध्यायों को हटाये जाने की आलोचना की है और कहा कि यह लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को चुनौती देने जैसा है।
किताबों को ‘युक्तिसंगत’ बनाने की कवायद के तहत एनसीईआरटी द्वारा पिछले साल बदलावों के साथ तैयार पुस्तकें अब बाजार में आ गयी हैं। आवर्त सारिणी तथा ‘लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियां’ के अलावा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान , प्राकृतिक संसाधनों का संपोषणीय प्रबंधन जैसे अध्याय/टॉपिक भी दसवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से हटा दिये गये हैं।
केरल के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने शुक्रवार रात को यहां जारी एक बयान में कहा, ‘‘ युक्तिसंगत बनाने की आड़ में इन 'टॉपिक' को एनसीईआरटी द्वारा हटाने की एकतरफा कार्रवाई हमारे देश के लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए चुनौती है। केरल पहले ही ऐलान कर चुका है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह देश के संपूर्ण लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती देता है।’’
उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, मौलाना आजाद तथा देश के साझे इतिहास, जैवविकास के सिद्धांत, आवर्त सारिणी, लोकतांत्रिक मूल्य तथा देश के समक्ष मौजूदा चुनौतियों से जुड़े अन्य टॉपिक हटाने का रूख अपनाया है ।
शिवनकुट्टी ने कहा, ‘‘ धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतंत्र की रक्षा करने तथा असल ऐतिहासिक तथ्यों को पढ़ाने एवं वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए केरल जन शिक्षा की निगरानी करेगा एवं उसे मजबूत करेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ केरल पहले ही ऐलान कर चुका है कि हम पाठ्पुस्तकों से हटाये गये खंडों को शामिल करने हुए तथा लोकतंत्र एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को समेटने वाले मूल इतिहास को अक्षुण्ण रखते हुए पूरक पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित करेंगे।’’
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