देश की खबरें | केजरीवाल ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी विधेयक पर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को उस विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना की, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए गठित की जाने वाली समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश की जगह एक कैबिनेट मंत्री को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा।
नयी दिल्ली, 10 अगस्त दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को उस विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना की, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए गठित की जाने वाली समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश की जगह एक कैबिनेट मंत्री को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा।
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को पेश एक विधेयक के मुताबिक, भविष्य में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति करेगी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री भी इस समिति के सदस्य होंगे।
यह विधेयक उच्चतम न्यायालय की ओर से मार्च में दिए गए उस आदेश के महीनों बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए संसद द्वारा कानून न बनाए जाने तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधान न्यायाधीश की सदस्यता वाली समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा इन चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
सोशल मीडिया मंच एक्स (पहले ट्विटर) पर जारी सिलसिलेवार पोस्ट में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि यह ‘‘बहुत खतरनाक स्थिति’’ है।
उन्होंने लिखा, ‘‘मैंने पहले भी कहा था कि प्रधानमंत्री देश की सर्वोच्च अदालत की बात नहीं मानते हैं। उनका संदेश स्पष्ट है-उच्चतम न्यायालय उनकी पसंद के खिलाफ जो भी फैसला देगा, वह उसे पलटने के लिए संसद के जरिये कानून लेकर आएंगे। अगर प्रधानमंत्री उच्चतम न्यायालय के फैसले का पालन नहीं करते हैं, तो यह बहुत खतरनाक स्थिति है।’’
केजरीवाल ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने एक निष्पक्ष समिति बनाई थी, जो निष्पक्ष निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करेगी। प्रधानमंत्री ने उच्चतम न्यायालय का फैसला पलटते हुए एक समिति गठित की है, जो उनके नियंत्रण में रहेगी और वह इसके जरिये अपनी पसंद के व्यक्ति को चुनाव आयुक्त बना सकते हैं। इससे चुनावों की निष्पक्षता पर असर पड़ेगा।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘प्रधानमंत्री एक के बाद एक अपने फैसलों से भारतीय लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।’’
एक अन्य पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रस्तावित समिति में ‘‘भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो और कांग्रेस का एक सदस्य’’ होगा। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जाहिर तौर पर नियुक्त होने वाला निर्वाचन आयुक्त भाजपा के प्रति वफादार होगा।’’
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली सेवा विधेयक के बाद केंद्र सरकार ‘एक बार फिर’ उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलट रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ जाकर दिल्ली सेवा विधेयक पारित करने के बाद केंद्र अब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के संबंध में विधेयक पेश कर न्यायालय के एक और आदेश को पलटने की कोशिश कर रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन संस्थानों-प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और निर्वाचन आयोग को बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था, उन पर अब केंद्र का साथ देने के आरोप लग रहे हैं।’’
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