ताजा खबरें | रिकॉर्ड मतदान के जरिए कश्मीर घाटी ने देश के दुश्मनों को करारा जवाब दिया : राष्ट्रपति

नयी दिल्ली, 27 जून हाल में हुए संसदीय चुनाव के दौरान जम्मू कश्मीर में मतदान के कई रिकॉर्ड टूटने का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि इन चुनाव के जरिए घाटी ने देश के दुश्मनों को करारा जवाब दिया है।

मुर्मू ने 18वीं लोकसभा में पहली बार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि अब भारत के भूभाग जम्मू-कश्मीर में भी संविधान पूरी तरह लागू हो गया है, जहां संविधान के अनुच्छेद 370 की वजह से स्थितियां कुछ और थीं।

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था और केंद्र सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को उसे निरस्त कर दिया था और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ये दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था। करीब 64 करोड़ मतदाताओं ने उत्साह और उमंग के साथ अपना कर्तव्य निभाया है। इस बार भी महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया। इस चुनाव की बहुत सुखद तस्वीर जम्मू-कश्मीर से भी सामने आई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर घाटी में मतदान के अनेक दशकों के रिकॉर्ड टूटे हैं। बीते चार दशकों में कश्मीर में हमने बंद और हड़ताल के बीच कम मतदान का दौर ही देखा था। भारत के दुश्मन, इसको वैश्विक मंचों पर जम्मू-कश्मीर की राय के रूप में दुष्प्रचारित करते रहे। लेकिन इस बार कश्मीर घाटी ने, देश और दुनिया में ऐसी हर ताकत को करारा जवाब दिया है।’’

निर्वाचन आयोग के अनुसार, कश्मीर घाटी के तीन संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों-श्रीनगर (38.49 प्रतिशत), बारामूला (59.1 प्रतिशत) और अनंतनाग-राजौरी (53 प्रतिशत) - में हालिया लोकसभा चुनावों में "कई दशकों में" सबसे अधिक मतदान हुआ।

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