देश की खबरें | कर्नाटक विधानसभा ने सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पारित किया
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बेंगलुरु, 21 मार्च कर्नाटक विधानसभा ने शुक्रवार को विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कड़े विरोध के बीच सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक पारित किया।
भाजपा विधायक विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर के आसन के समीप आए गए और उन पर कागज फेंकने लगे।
खादर के निर्देश पर मार्शल ने उन विधायकों को बाहर निकाल दिया जो अध्यक्ष के आसन को घेरने की कोशिश कर रहे थे।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने विधेयक को ‘‘असंवैधानिक’’ करार दिया। विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने ‘कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (संशोधन) विधेयक, 2025’ को पेश किया।
पिछले शुक्रवार को मंत्रिमंडल ने ‘कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता’ (केटीपीपी) अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत दो करोड़ रुपये तक के (सिविल) कार्यों और एक करोड़ रुपये तक के माल/सेवा खरीद अनुबंध में मुसलमानों को चार प्रतिशत का आरक्षण का प्रावधान किया गया था। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सात मार्च को पेश किए गए अपने 2025-26 के बजट में इसकी घोषणा की थी।
वर्तमान में, कर्नाटक में सिविल कार्य ठेकों में एससी/एसटी के 24 प्रतिशत जबकि ओबीसी से संबंधित श्रेणी-1 तथा श्रेणी-2ए के लिए क्रमश: चार प्रतिशत और 15 प्रतिशत आरक्षण है। चार प्रतिशत आरक्षण के साथ ओबीसी की श्रेणी-2बी के तहत मुसलमानों को जोड़ने की मांग की गई थी।
भाजपा ने सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के कर्नाटक सरकार के कदम को ‘‘असंवैधानिक दुस्साहस’’ करार दिया और कहा कि जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता, वह इसे अदालत में चुनौती देने सहित सभी स्तरों पर इसका विरोध करेगी।
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