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देश की खबरें | कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध : न्यायालय ने छात्रों के पढ़ाई छोड़ने पर प्रामाणिक आंकड़े के बारे में पूछा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सवाल किया कि क्या हिजाब प्रतिबंध और इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के फैसले के कारण कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों के पढ़ाई छोड़ने के संबंध में कोई प्रामाणिक आंकड़ा है।

देश की खबरें | कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध : न्यायालय ने छात्रों के पढ़ाई छोड़ने पर प्रामाणिक आंकड़े के बारे में पूछा

नयी दिल्ली, 14 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सवाल किया कि क्या हिजाब प्रतिबंध और इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के फैसले के कारण कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों के पढ़ाई छोड़ने के संबंध में कोई प्रामाणिक आंकड़ा है।

याचिकाकर्ताओं में से एक की तरफ से पेश हुए वकील ने विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं द्वारा स्कूल छोड़ने का मुद्दा उठाया। इस पर न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा, “क्या आपके पास प्रमाणिक आंकड़े हैं कि हिजाब प्रतिबंध और उसके बाद उच्च न्यायालय के फैसले के चलते 20, 30, 40 या 50 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी?”

याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने एक रिपोर्ट का संदर्भ दिया और कहा कि उसमें कई छात्रों के बयान हैं।

उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के राज्य के शिक्षण संस्थानों में हिजाब से प्रतिबंध हटाने से इनकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही पीठ से कहा, “मेरे दोस्त (वकीलों में से एक) ने मुझे सूचित किया कि इस विशेष फैसले के बाद 17,000 विद्यार्थी वास्तव में परीक्षा से दूर रहे।’’

अहमदी ने कहा कि इस मामले में सरकारी आदेश का असर यह होगा कि जो लड़कियां पहले स्कूलों में जाकर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा ले रही थीं, उन्हें मदरसों में वापस जाने के लिए मजबूर किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “किसी को ऐसा क्यों महसूस होना चाहिए कि एक धार्मिक संस्कार किसी भी तरह से वैध या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा या एकता में बाधा डालेगा? किसी के हिजाब पहनकर स्कूल जाने पर दूसरे को क्यों आपत्ति होनी चाहिए? अन्य छात्रों को इससे क्यों समस्या होनी चाहिए?"

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने तर्क दिया कि इस मामले का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हिजाब पहनने वाले के साथ धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “इस मामले के महत्वपूर्ण होने का कारण यह है कि जब यह फैसला किया गया था, तो सुर्खियां यह नहीं थीं कि ड्रेस कोड को बरकरार रखा गया था, शीर्षक थे हिजाब को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हटा दिया।”

पीठ ने कहा कि अखबारों में जो लिखा है, वह उसके आधार पर नहीं चलता।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। उच्च न्यायालय के फैसले में कहा गया है कि हिजाब पहनना आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है जिसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित किया जा सकता है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 14, 2022 09:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).