देश की खबरें | कानपुर आश्रय गृह की लड़कियों के कोविड से संक्रमित होने के मामले में उप्र सरकार से रिपोर्ट तलब

नयी दिल्ली, सात जुलाई उच्चतम न्यायालय ने कानपुर के आश्रय गृह में कोरोना वायरस से संक्रमित मिलीं 57 नाबालिग लड़कियों के बारे में छपी खबरों पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच देश भर में संरक्षण में रह रहे बच्चों - भले ही वे किशोर गृह हों, पालक घर या रिश्तेदारों के साथ रह रहे हों- की स्थिति पर स्वत: संज्ञान लिया है और उसने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में तीन अप्रैल को दिये गये निर्देशों के अनुपालन पर सभी राज्यों से रिपोर्ट मांगी है।

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हाल में, वकील अपर्णा भट ने एक आवेदन दायर कर 57 नाबालिग लड़कियों के लिये उचित ‘‘उपचार एवं सुविधाओं” का अनुरोध किया था, जो उत्तर प्रदेश के कानपुर के आश्रय गृह में कोविड-19 की जांच में संक्रमित मिली थीं।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु की वकील ने न्यायालय को सूचित किया कि चेन्नई के रोयापुरम में सरकारी आश्रय गृह में कोरोना वायरस से संक्रमित 35 बच्चे अब स्वस्थ हो गए हैं और फिर से केंद्र में आ गए हैं।

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न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने अधिवक्ता गौरव अग्रवाल को न्यायमित्र नियुक्त किया और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा ओडिशा जैसे राज्यों को शुक्रवार तक न्याय मित्र को अपने जवाब देने का निर्देश दिया। पीठ इस मामले में अब 13 जुलाई को आगे सुनवाई करेगी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मणिपर के अलावा बाकी सभी राज्यों ने हमारे 11 जून के आदेश के अनुरूप अपने जवाब दाखिल कर दिये हैं।’’

पीठ ने आगे कहा, ‘‘सभी राज्यों के एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड को निर्देश दिया जाता है कि उनके द्वारा दाखिल जवाब की प्रति दो दिन के भीतर न्याय मित्र को सौंपी जाये। एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड को इन रिपोर्ट की डिजिटल प्रति भी देने की अनुमति दी जाती है।’’

न्यायालय ने तीन अप्रैल को सभी राज्य सरकारों और कई अन्य अधिकारियों को संरक्षण में रहने वाले बच्चों की संरक्षा के लिए कई निर्देश दिये थे।

न्यायालय ने यह भी कहा था कि जैसे-जैसे वैश्विक महामारी बढ़ रही है, यह महत्त्वपूर्ण है कि बाल देखभाल संस्थानों, देखभाल एवं संरक्षण केंद्रों और पालक गृहों एवं रिश्तेदारों के पास रह बच्चों में वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्राथमिकता से तत्काल कदम उठाए जाएं।

न्यायालय ने कहा था कि किशोर न्याय बोर्ड को निगरानी गृहों में रहने वाले ऐसे सभी बच्चों को जमानत पर रिहा करने के लिये कदम उठाने पर विचार करना चाहिए, बशर्ते ऐसा नहीं करने के लिये उसके पास ठोस वजह हों।

अनूप

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