ताजा खबरें | लोकसभा में किशोर न्याय बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण संशोधन विधेयक पेश

नयी दिल्ली, 15 मार्च लोकसभा में सोमवार को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 पेश किया गया जिसमें मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने तथा जवाबदेही बढ़ाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट तथा अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को सशक्त बनाया गया है।

लोकसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने विधेयक पेश किया।

कांग्रेस के शशि थरूर ने सदन के कामकाज के नियम 72 का उल्लेख करते हुए इस विधेयक को पेश किये जाने का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक से संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन होता है। इसमें बाल अधिकारों से जुड़ी कई संस्थाओं की निगरानी को एक एजेंसी के तहत लाया जा रहा है।

इस पर स्मृति ईरानी ने कहा कि यह विधेयक लाने का केंद्र सरकार को पूरा अधिकार है। इस विधेयक के लिए राज्यों से बात की गई और केरल ने भी इसका समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समितियों को ज्यादा ताकत दी जा रही है। इससे बच्चों का बेहतर ढंग से संरक्षण में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के माध्यम से किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 में संशोधन किया जा रहा है।

इसके माध्यम से बच्चों के संरक्षण के ढांचे को जिलावार एवं प्रदेशवार मजबूत बनाने के उपाए किये गए हैं।

इन प्रस्तावित संशोधनों में जे जे अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने के मुद्दे को जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को अधिकृत किया गया है ताकि ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके और जवाबदेही तय की जा सके ।

इसके तहत जिला अधिकारियों को कानून के तहत निर्बाध अनुपालन सुनिश्चित करने और कठिनाई में पड़े बच्चों के लिये सुसंगत प्रयास करने के लिये अधिकार सम्पन्न किया गया है ।

जिला मजिस्ट्रेट को अधिनियम के तहत और अधिक सशक्त बनाते हुए कानून के सुचारू क्रियान्यवन का भी अधिकार दिया गया है जिससे संकट की स्थिति में बच्चों के पक्ष में समन्वित प्रयास किए जा सके।

सीडब्ल्यूसी सदस्यों की नियुक्ति संबंधी योग्यता मानदंडों को परिभाषित करने और पहले से अनिर्धारित अपराधों को 'गंभीर अपराध' के रूप में वर्गीकृत करने की भी बात विधेयक के प्रस्ताव में कही गयी है।

इसके माध्यम से कानून के विभिन्न प्रावधानों पर अमल में आने वाली दिक्कतों को भी दूर करने की बात कही गई है।

दीपक हक वैभव

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