देश की खबरें | न्यायमूर्ति शांतनगौदर आम आदमी के जज, उनके निधन से शीर्ष अदालत को नुकसान: सीजेआई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मोहन एम शांतनगौदर को श्रद्धांजलि दी तथा कहा कि उनके आकस्मिक निधन से सर्वोच्च न्यायपालिका का बहुत बड़ा नुकसान" हुआ।
नयी दिल्ली, छह दिसंबर भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मोहन एम शांतनगौदर को श्रद्धांजलि दी तथा कहा कि उनके आकस्मिक निधन से सर्वोच्च न्यायपालिका का बहुत बड़ा नुकसान" हुआ।
न्यायमूर्ति शांतनगौदर की सेवानिवृत्ति से करीब तीन साल पहले गत अप्रैल में यहां एक अस्पताल में निधन हो गया था। उन्हें 17 फरवरी, 2017 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और उनका कार्यकाल पांच मई, 2023 तक था। उनकी मृत्यु 62 वर्ष की उम्र में 24 अप्रैल की देर रात गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में हुई थी।
सीजेआई ने दिवंगत न्यायाधीश की स्मृति में शीर्ष अदालत में हाइब्रिड मोड में आयोजित ‘फुल कोर्ट रिफ्रेंस’ में कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे अपने सबसे मूल्यवान सहयोगियों में से एक की मृत्यु पर शोक व्यक्त करना होगा। उनका आकस्मिक निधन शीर्ष अदालत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से देश ने ‘आम आदमी का जज’ खो दिया है। मैंने व्यक्तिगत रूप से एक सबसे प्रिय मित्र और एक मूल्यवान सहयोगी खो दिया है।”
सीजेआई ने उनके कुछ प्रमुख फैसलों को याद करते हुए कहा कि देश के न्यायशास्त्र में उनका योगदान निर्विवाद है। उन्होंने कहा, ‘‘आप सभी उनके फैसलों से पहले से ही भलीभांति परिचित हैं और मैं इनके बारे में विस्तार से चर्चा करना नहीं चाहता।’’
न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि न्यायमूर्ति शांतनगौदर के फैसले उनकी विचार प्रक्रिया, उनके वर्षों के अनुभव, ज्ञान और अनंत बुद्धिमता में गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
उन्होंने न्यायमूर्ति शांतनगौदर के साथ करीब डेढ साल तक पीठ साझा किये जाने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, "उनके निर्णयों ने सादगी, प्रचुर सामान्य ज्ञान और एक व्यावहारिक दृष्टिकोण दिखाया। वह हमेशा सामाजिक समानता, और लोगों के अधिकारों एवं स्वतंत्रता के बारे में चिंतित रहते थे।”
बैठक में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि दिवंगत न्यायाधीश का व्यक्तित्व सरल था। वह आपराधिक कानून में सबसे प्रतिभाशाली कानूनी विशेषज्ञों में से एक थे।
शीर्ष विधि अधिकारी ने न्यायमूर्ति शांतनगौदर के अंतिम फैसलों में से एक को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लॉकरों के संबंध में बैंकों की जवाबदेही की ओर इशारा करके सार्वजनिक आय बढ़ाने की कोशिश की थी और आरबीआई को ग्राहकों को लॉकर सुविधा देने के संबंध में कदमों को लागू करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी दिवंगत न्यायाधीश को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह कभी भी निडर निर्णय लेने से नहीं कतराते थे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)