देश की खबरें | न्यायमूर्ति गीता मित्तल मणिपुर हिंसा पीड़ितों के पुनर्वास के संबंध में गठित समिति की प्रमुख होंगी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. न्यायमूर्ति गीता मित्तल मणिपुर जातीय हिंसा के पीड़ितों के राहत और पुनर्वास की निगरानी के लिए सोमवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्च न्यायालयों की पूर्व महिला न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय समिति की प्रमुख होंगी। वह जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं।
नयी दिल्ली, सात अगस्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल मणिपुर जातीय हिंसा के पीड़ितों के राहत और पुनर्वास की निगरानी के लिए सोमवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्च न्यायालयों की पूर्व महिला न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय समिति की प्रमुख होंगी। वह जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं।
तीन अगस्त, 2018 को जम्मू और कश्मीर की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त की गईं न्यायमूर्ति मित्तल आठ दिसंबर, 2020 को सेवानिवृत्त हुईं। वह दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज की पूर्व छात्रा हैं।
मित्तल के अलावा समिति में बंबई उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शालिनी पी जोशी और दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन शामिल हैं। यह समिति पीड़ितों को राहत और पुनर्वास तथा उन्हें मुआवजा प्रदान किए जाने पर निगरानी रखेगी।
महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसालगिकर जातीय संघर्ष से जूझ रहे राज्य में आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी करेंगे। वे अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपेंगे, जो अभियोजन से लेकर पुनर्वास तक हिंसा के सभी पहलुओं की निगरानी करेगी।
न्यायमूर्ति मित्तल का जन्म नौ दिसंबर, 1958 को हुआ। उन्होंने लेडी इरविन हायर सेकेंडरी स्कूल और फिर लेडी श्री राम कॉलेज में पढ़ाई की और 1978 में इकनॉमिक्स ऑनर्स में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘कैम्पस लॉ सेंटर’ से कानून में स्नातक मित्तल को 2004 में दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायमूर्ति मित्तल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने 1981 से 2004 तक दिल्ली में वकालत की।
बंबई उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिनी पी जोशी 1988 में न्यायिक सेवाओं में शामिल हुईं और अप्रैल, 2014 में बंबई उच्च न्यायालय की रजिस्ट्रार जनरल का पद संभालने से पहले जिला अदालतों में न्यायाधीश के रूप में काम किया। बाद में उन्हें एक जनवरी, 2015 को बंबई उच्च न्यायालय की अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
समिति की तीसरी सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आशा मेनन हैं। मेनन को 27 मई, 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय की स्थायी न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया था। वह 16 सितंबर, 2022 को सेवानिवृत्त हुईं।
मेनन 1985 में, दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल हुईं और 1986 में निचली अदालत की न्यायाधीश बनीं। वह 2008 से 2012 तक दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव भी रहीं।
महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसालगिकर मणिपुर में आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी करेंगे। वर्ष 1982 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी पडसालगिकर कुछ वर्षों के लिए खुफिया ब्यूरो (आईबी) में प्रतिनियुक्ति पर थे। इसके बाद 30 जनवरी, 2016 को उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त बनाया गया।
महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में पदोन्नत होने से पहले पडसालगिकर ने 29 जून, 2018 तक मुंबई पुलिस के प्रमुख के रूप में कार्य किया। उन्हें 29 अक्टूबर, 2019 को उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया।
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