नयी दिल्ली, 26 नवंबर अटॉर्नी जनरल (एजी) आर वेंकटरमणी ने रविवार को कहा कि सभी के लिए न्याय तक पहुंच का संवैधानिक वादा केवल मुकदमेबाजी तक पहुंच के माध्यम से हासिल नहीं किया जा सकता है और विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
वेंकटरमणी ने इस बात पर जोर दिया कि गरीब और हाशिये पर के लोग एक प्रतिकूल प्रणाली में सबसे अधिक पीड़ित होते हैं और इस प्रकार उन्होंने सरकार से मध्यस्थता को एक विकल्प के रूप में आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि अदालतों और मुकदमेबाजी से परे न्याय तक पहुंच तलाशने की जरूरत है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, "मैं भारतीय बार की ओर से सभी सरकारों से अपील करता हूं कि वे मुद्दों और मतभेदों को निपटाने की एकमात्र स्थायी और किफायती प्रणाली के रूप में मध्यस्थता पर अपना ध्यान केंद्रित करें... मध्यस्थता कानून के लागू होने के बाद हमें विवाद टालने और विवाद समाधान की दिशा में मध्यस्थता प्रणाली को प्रमुख मार्गदर्शक शक्ति के रूप में आगे बढ़ाने के लिए एक लंबी छलांग लगाने की जरूरत है।’’
वेंकटरमणी संविधान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि संविधान दिवस "सभी के लिए राष्ट्रीय घोषणापत्र दिवस" है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष आदिश सी अग्रवाल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान एक मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा संरक्षित है और बार उन सभी पहलों में पूर्ण सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है जो लोगों को न्याय के करीब लाती हैं।
अग्रवाल ने कोविड-19 महामारी के दौरान कड़ी मेहनत करने और आभासी सुनवाई को अपनाकर अदालतों तक पहुंच बढ़ाने के लिए न्यायाधीशों की सराहना की।
उन्होंने कहा, ''मुझे खुशी है कि सीजेआई चंद्रचूड़ ने 2024 में शीर्ष अदालत में कार्य दिवसों की संख्या बढ़ाकर 190 कर दी है। हमें उम्मीद है कि वर्ष 2025 में सर्वोच्च न्यायालय में कार्य दिवसों की संख्या 200 को पार कर सकती है।''
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY