देश की खबरें | न्यायाधीश कानून की सिर्फ व्याख्या करते हैं, नीति निर्माण के लिए नहीं हैं : दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

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नयी दिल्ली, 11 मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल ने शुक्रवार को कहा कि न्यायाधीश सिर्फ कानूनों की व्याख्या करने के लिए हैं, नीति निर्माण या उनमें सुधार करने के लिए नहीं है और उन्हें न्यायिक सक्रियातावाद और संयम के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।

न्यायमूर्ति पटेल 62 साल की आयु पूरी होने पर 12 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पदभार से मुक्त हो जाएंगे। न्यायमूर्ति पटेल ने आज कहा कि कानून और न्याय के बीच जब भी अंतर होता है तो अपवाद के रूप में न्यायिक सक्रियतावाद की जरूरत होती है और यह ‘भूमिका का मसला’ नहीं हो सकता है।

उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित बिदाई समारोह में न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘(कानून बनाने का काम) संसद का है और कानून की अनुपस्थिति में नीति निर्माण का काम कार्यपालिका का है... इसलिए न्यायिक सक्रियतावाद और न्यायिक संयम के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।’’

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर (न्याय और कानून के बीच) कोई अंतर है तो, एक न्यायाधीश को उस अंतर को भरना होगा और वह न्यायिक सक्रियतावाद कहलाएगा। यह अपरिहार्य है। लेकिन यह अपवाद हो सकता है, भूमिका नहीं हो सकती। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि हम यहां कानून बनाने के लिए या नयी नीतियों के निर्माण के लिए नहीं है, हम यहां सिर्फ कानून की व्याख्या करने के लिए हैं। जैसा कि मैंने कहा, अपवाद के स्वरूप जब भी कानून और न्याय के बीच अंतर होगा, वहां न्यायिक सक्रियता जरूर होगी।’’

न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि न्यायाधीशों का प्राथमिक काम न्यायिक आदेशों के माध्यम से न्याय देना है और ‘‘बार के सदस्य तथा पीठ दोनों की नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी बनती है और हम सभी समाज के सबसे निचले स्तर पर मौजूद व्यक्ति को भी न्याय दिलाने के लिए संविधान के प्रावधानों से बंधे हुए हैं।’’

बिदाई समारोह के दौरान न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने कहा कि न्यायमूर्ति पटेल के सक्रिय दृष्टिकोण के कारण ही दिल्ली उच्च न्यायालय में हुई वर्चुअल सुनवाई और हाईब्रिड सुनवाई की देश के अन्य उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय ने प्रशंसा की।

देश में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 साल की आयु में जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 साल की आयु में सेवा निवृत्त होते हैं।

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