ताजा खबरें | वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी: विपक्ष के हंगामे के बाद संसद में सरकार ने पेश किया शुद्धिपत्र
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नयी दिल्ली, 13 फरवरी वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट में असहमति की अभिव्यक्ति से जुड़े हिस्सों को कथित रूप से हटाए जाने के मुद्दे पर विपक्षी दलों के हंगामे के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मेधा विश्राम कुलकर्णी ने बृहस्पतिवार दोपहर उच्च सदन में एक शुद्धिपत्र पेश किया।
कुलकर्णी ने रिपोर्ट के परिशिष्ट पांच का शुद्धिपत्र राज्यसभा में भोजनावकाश के बाद पेश किया। उन्होंने सुबह सदन में रिपोर्ट पेश की थी।
रिपोर्ट के परिशिष्ट का अध्याय पांच ‘संयुक्त समिति के सदस्यों से प्राप्त टिप्पणियों/असहमतियों के कार्यवृत्त’ से संबंधित है और इसमें वे टिप्पणी शामिल हैं जिन्हें पहले की पेश की गई रिपोर्ट में संपादित किया गया था।
भाजपा सदस्य ने जैसे ही शुद्धिपत्र पेश किया, एक विपक्षी सदस्य ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह साबित करता है कि सदन को पहले एक मंत्री द्वारा गुमराह किया गया था।
इससे पहले, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने जेपीसी की रिपोर्ट में विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को शामिल नहीं करने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया और भारी हंगामे के बाद उच्च सदन से बहिर्गमन किया।
हालांकि, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को सच्चाई से परे बताते हुए उन्हें खारिज कर दिया और उस पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि जेपीसी की पूरी रिपोर्ट को बगैर किसी संशोधन के पेश किया गया है और इसमें विपक्षी सदस्यों की असहमति टिप्पणी (डिसेंट नोट) को भी शामिल किया गया है।
शुद्धिपत्र के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए, सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘‘यह दर्शाता है कि संसदीय संस्थाएं फल-फूल रही हैं, भावनाओं को ध्यान में रखा जा रहा है, कदम उठाए जा रहे हैं और इससे हमें एक और संदेश जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इससे यह बात भी सामने आती है कि हमें कानून का सहारा लेना चाहिए न कि किसी ऐसी चीज में शामिल होना चाहिए जिसे लोग स्वीकार नहीं कर सकते या जो उनकी अरुचिकर हो। केवल आदान-प्रदान और बातचीत से ही हल निकल सकता है।’’
धनखड़ ने कहा, ''मैं सरकार का आभार व्यक्त करता हूं क्योंकि यह मामला मेरे संज्ञान में लाया गया।’’
हालांकि, विपक्षी सदस्यों को यह कहते हुए सुना गया कि यह उनके दबाव में किया गया है।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार को वक्फ विधेयक पर जेपीसी में विपक्ष की असहमति वाली टिप्पणियों को शामिल कर सदन में पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘ जनता के सामने झुकने को मजबूर हुई मोदी सरकार! सरकार को आज संसद में रंगे हाथों पकड़ा गया जब हमने मांग की कि मंत्री वक्फ विधेयक जेपीसी रिपोर्ट से विपक्षी असहमति की अभिव्यक्ति के बारे में ऑन रिकॉर्ड बताएं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब अपराह्न साढ़े तीन बजे सरकार ने राज्यसभा में शुद्धिपत्र जारी किया है और वक्फ जेपीसी रिपोर्ट को विपक्ष के असहमति नोट के साथ पेश करने के लिए मजबूर किया गया है। रचनात्मक विपक्ष हमारी संस्थाओं को बचाने के लिए लड़ रहा है।’’
इससे पहले बृहस्पतिवार को जब रिपोर्ट सदन में पेश की गई तो गोखले ने मांग की थी कि अगर असहमति नोट में कोई संशोधन किया गया है तो रीजीजू को जवाब देना चाहिए।
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