नयी दिल्ली, पांच मार्च यूरोपीय रक्षा कंपनी जॉन कॉकरिल और भारतीय कंपनी इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स लिमिटेड (ईपीएचएल) ने भारतीय सेना के जोरावर लाइट टैंक कार्यक्रम के लिए टर्रेट (बुर्ज) बनाने के लिए एक संयुक्त उद्यम गठित किया है।
किसी टैंक के ऊपरी हिस्से में लगी घूमने वाली और भारी बख्तरबंद संरचना बुर्ज होती है। यह तोप की नली को टैंक के मुख्य ढांचे से जोड़ती है।
बेल्जियम स्थित जॉन कॉकरिल के अधिकारियों ने बताया कि यह संयुक्त उद्यम भारतीय सेना को बुर्ज की आपूर्ति करने के साथ निर्यात बाजार की संभावनाओं पर भी काम करेगा।
भारत जोरावर टैंक विकसित कर रहा है, जो एक अत्यधिक बहुउद्देशीय मंच है। इसे चीन के साथ लगी सीमा पर भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
भारतीय सेना हल्के वजन वाले 350 से अधिक टैंकों की तैनाती की योजना बना रही है, जिनमें से अधिकांश पहाड़ी सीमावर्ती इलाकों में तैनात किए जाएंगे।
दोनों कंपनियों ने कहा कि यह संयुक्त उद्यम भारतीय सेना के हल्के टैंक कार्यक्रम के लिए बुर्ज के विनिर्माण, असेंबली और उसके उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है।
इसके अलावा संयुक्त उद्यम निर्यात बाजारों के लिए भी बुर्ज का निर्माण करने की योजना बना रहा है।
संयुक्त उद्यम शुरूआती चरण में हल्के टैंक कार्यक्रम को कुल 59 बुर्ज की आपूर्ति करेगा।
हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस संयुक्त उद्यम में किए जा रहे निवेशों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
यह पहली बार होगा जब जॉन कॉकरिल यूरोप के बाहर किसी देश में बुर्ज का विनिर्माण करेगा।
जॉन कॉकरिल डिफेंस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) थिएरी रेनॉडिन ने कहा, ‘‘जॉन कॉकरिल भारत के साथ मिलकर देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स प्राइवेट लि. के साथ यह संयुक्त उद्यम भारत की रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को बताता है।’’
इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स में संयुक्त प्रबंध निदेशक इनग्रिड रस्किन्हा ने कहा कि उनकी कंपनी भारत के रक्षा आधुनिकीकरण लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा,‘‘यह संयुक्त उद्यम ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। यह सुनिश्चित करता है कि विश्वस्तरीय रक्षा समाधान घरेलू स्तर पर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विनिर्मित किए जाएं।’’
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