देश की खबरें | जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद ने सफदरजंग अस्पताल में इलाज से इनकार किया था : सीबीआई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि 15 अक्टूबर 2016 को कथित रूप से लापता हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र नजीब अहमद ने सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने से इनकार कर दिया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने अहमद पर कथित तौर पर हमला किया था।

नयी दिल्ली, सात अप्रैल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि 15 अक्टूबर 2016 को कथित रूप से लापता हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र नजीब अहमद ने सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने से इनकार कर दिया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने अहमद पर कथित तौर पर हमला किया था।

सीबीआई ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी के समक्ष अपनी क्लोजर रिपोर्ट और अहमद की मां फातिमा नफीस द्वारा दायर विरोध याचिका पर बहस के दौरान यह दलील दी।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि अहमद के अस्पताल जाने की बात दर्शाने वाले दस्तावेज के अभाव के कारण अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल अटेंडेंट के बयान नहीं लिए गए।

जांच अधिकारी ने दावा किया, "अस्पताल जाने पर अहमद को एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) कराने की सलाह दी गई थी। हालांकि, वह अपने दोस्त मोहम्मद कासिम के साथ छात्रावास वापस चला गया और उसने कोई एमएलसी नहीं कराई।"

न्यायाधीश ने दलीलें दर्ज कीं और मामले की सुनवाई नौ मई तक के लिए स्थगित कर दी और अगली तारीख पर जांच अधिकारी को भी उपस्थित होने का आदेश दिया।

अक्टूबर 2018 में सीबीआई ने मामले की जांच बंद कर दी थी क्योंकि जेएनयू में परास्नातक के छात्र अहमद का पता लगाने के एजेंसी के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला था।

दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद एजेंसी ने मामले में अदालत के समक्ष अपनी क्लोजर रिपोर्ट दायर की।

अहमद 15 अक्टूबर 2016 को जेएनयू के माही-मांडवी छात्रावास से लापता हो गया था। इससे एक रात पहले एबीवीपी से जुड़े कुछ छात्रों के साथ कथित तौर पर उसकी झड़प हुई थी।

नफीस के वकील ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि यह एक "राजनीतिक मामला" है और "सीबीआई अपने आकाओं के दबाव के आगे झुक गई है।”

इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस ने की थी लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया।

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