मुंबई, दो सितंबर विशेष धनशोधन रोधी अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने जेट एयरवेज के संस्थापक 70 वर्षीय नरेश गोयल को बैंक धोखाधड़ी मामले में शनिवार को 11 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यहां एक अदालत को बताया कि जेट एयरवेज द्वारा उधार ली गई धनराशि का इस्तेमाल इसके संस्थापक नरेश गोयल ने ‘‘व्यक्तिगत लाभ और समृद्धि’’ के लिए दुरुपयोग किया था।
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत ने यह बात 538 करोड़ रुपये के कथित ऋण धोखाधड़ी के उस मामले में गोयल की हिरासत का अनुरोध करते हुए कही जो केनरा बैंक द्वारा दायर एक शिकायत पर दर्ज किया गया था।
इसके बाद विशेष धनशोधन रोधी अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने गोयल को 11 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
गोयल की हिरासत का अनुरोध करते हुए ईडी ने दावा किया कि अब बंद हो चुकी जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड (जेआईएल) द्वारा केनरा बैंक से लिए गए ऋण का इस्तेमाल अन्य अनधिकृत उद्देश्यों के अलावा फर्नीचर, परिधान और आभूषण जैसी चीजें खरीदने के लिए किया गया।
ईडी ने कहा कि जेआईएल के कोष का इस्तेमाल उनके आवासीय कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने और उनकी बेटी के स्वामित्व वाली एक उत्पादन कंपनी के परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी किया गया था।
केंद्रीय एजेंसी ने गोयल को यहां अपने कार्यालय में लंबी पूछताछ के बाद शुक्रवार रात को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार कर लिया। शनिवार दोपहर करीब 12.30 बजे उन्हें अदालत में पेश किया गया।
धनशोधन का मामला जेट एयरवेज, गोयल, उनकी पत्नी अनीता और उनकी एयरलाइन के कुछ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से उपजा है।
केनरा बैंक की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसने जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड को 848.86 करोड़ रुपये की ऋण सीमा और ऋण मंजूर किए थे, जिनमें से 538.62 करोड़ रुपये बकाया थे। उसने आरोप लगाया कि जेआईएल ने धन अपनी सहायक कंपनियों को हस्तांतरित किया या उनका दुरुपयोग किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक भारतीय स्टेट बैंक सहित बैंकों के एक परिसंघ का जेआईएल पर कुल मिलाकर 6,000 करोड़ रुपये का बकाया है।
केनरा बैंक का 538.62 करोड़ रुपये के बकाया के साथ जेआईएल ऋण खाता 2019 में गैर निष्पादित परिसम्पत्ति (एनपीए) में तब्दील हो गया। ईडी ने दावा किया कि यह एनपीए और कुछ नहीं बल्कि "अपराध की आय" थी, जिसे निर्धारित उद्देश्य के इतर इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने दावा किया कि विभिन्न व्यक्तियों/संस्थाओं को भुगतान की गई पेशेवर और परामर्श शुल्क की आड़ में भी धन की हेराफेरी की गई।
ईडी ने कहा कि अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाई) की एक ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है कि 2011-12 से 2018-19 के बीच विभिन्न उद्देश्यों के लिए जेआईएल के खातों से नरेश गोयल के परिवार के सदस्यों - उनकी पत्नी अनीता गोयल, बेटी नम्रता गोयल और बेटे निवान गोयल को 9.46 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
उसने कहा कि इन लेनदेन का कोई औचित्य नहीं था और यह कंपनी के कोष को "व्यक्तिगत लाभ और संवर्धन" के लिए इस्तेमाल करने के "गुप्त उद्देश्य" से किया गया था।
ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए, ईडी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि गोयल की बेटी के स्वामित्व वाले प्रोडक्शन हाउस फ्लिमस्टॉक प्राइवेट लिमिटेड के वेतन और परिचालन खर्च जेआईएल द्वारा "संभावित रूप से वहन" किए गए थे।
उसने कहा कि कुछ ईमेल से संकेत मिलता है कि नरेश गोयल के मुंबई और दिल्ली स्थित आवासों के कर्मचारियों का वेतन खर्च भी कंपनी द्वारा "संभावित रूप से वहन" किया गया था।
ईडी ने अदालत को बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि नरेश गोयल और उनकी पत्नी द्वारा खरीदी गई "फर्नीचर, परिधान और आभूषण जैसी कुछ चल संपत्ति" के लिए कंपनी के खातों से भुगतान किया गया था।
ईडी ने अदालत को बताया कि जेआईएल ने एक सहायक कंपनी जेट लाइट लिमिटेड (जेएलएल) को 2,547.83 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि देकर और बाद में उन्हें बट्टे खाते में डालकर धन का हेरफेर किया।
उसने कहा कि जेआईएल ने उन चीजों के लिए भी 403.27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जो धन उधार लेने के उद्देश्य के अनुरूप नहीं थे।
उसने कहा कि इसके अलावा, गोयल ने अपने द्वारा बनाई गई और ‘टैक्स हेवन कंट्रीज’ (कर चोरी के उद्देश्य से अनुकूल माहौल मुहैया कराने वाले देश) में स्थित विभिन्न कंपनियों और न्यासों को धन भेजा और दुबई और ब्रिटेन सहित विदेशी देशों में संपत्तियां हासिल कीं।
ईडी ने गोयल की 14 दिनों की हिरासत का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘वह अपने जवाब में टालमटोल कर रहे थे’’ और ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य और उनके उपयोग के बारे में जानकारी नहीं दी।
बचाव पक्ष के वकील अबाद पोंडा और अमित नाइक ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने बैंकों के एक परिसंघ की शिकायतों पर शुरू की गई कार्यवाही में जांच पर रोक लगा दी थी।
उन्होंने कहा कि जिस फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच की जा रही थी, उसे गोयल के साथ कभी साझा नहीं किया गया, लेकिन 8 मई, 2020 को संयुक्त ऋणदाताओं की बैठक में इस पर चर्चा की गई। नाइक ने दलील दी कि इस बैठक में कहा गया कि धोखाधड़ी का कोई निर्णायक सबूत नहीं है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गोयल को 11 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
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