देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर 'बुरी नजर' की साये से बाहर निकलकर प्रमुख पर्यटन स्थल बनेगा: उमर
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नयी दिल्ली, 19 फरवरी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि राज्य 'बुरी नजर' के साये से बाहर निकल रहा है और भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में अपना दर्जा पुनः प्राप्त करने की कगार पर है।
अब्दुल्ला ने विश्व भर के लोगों को इस मनोरम क्षेत्र का भ्रमण करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे 'धरती पर स्वर्ग' के नाम से जाना जाता है।
यहां यशोभूमि में एसएटीटीई प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की समृद्ध और विविध स्थलों पर प्रकाश डाला तथा गुलमर्ग और पहलगाम जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों एवं माता वैष्णो देवी और अमरनाथ तीर्थस्थलों की धार्मिक तीर्थयात्रा के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने साउथ एशियाज एंड टूरिज्म एक्सचेंज (एसएटीटीई) में कहा कि जम्मू-कश्मीर में छुट्टियां मनाने वालों से लेकर साहसिक खेल प्रेमियों और समाज में प्रभाव डालने वाले व्यक्तियों से लेकर सोशल मीडिया के प्रति उत्साही लोगों तक, सभी की संतुष्टि के लिए बहुत कुछ है।
मुख्यमंत्री ने कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क के बारे में बात की, जिसमें सीधा रेल संपर्क भी शामिल है और इसके जल्द ही शुरू होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, “ बुरी नजर के कारण जम्मू-कश्मीर में पिछले 30 से 35 वर्षों से कठिन समय रहा है, लेकिन अब यह क्षेत्र इससे उबर रहा है और एक बार फिर घरेलू पर्यटन के लिए भारत के प्रमुख स्थलों में से एक है।”
अब्दुल्ला ने 1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा, "विभिन्न दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों द्वारा जारी यात्रा परामर्शों से उत्पन्न कठिनाइयों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में भी वृद्धि हो रही है।”
उन्होंने प्रसिद्ध फारसी कवि अमीर खुसरो के इस कथन का भी उल्लेख किया कि "गर फिरदौस, बर रूहे ज़मीन अस्त, हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त (यदि इस धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है)।
अब्दुल्ला ने कहा, “जम्मू को मंदिरों के शहर के रूप में जाना जाता है और यहां विरासत और सीमा पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। गुरेज जैसे स्थान, जो कभी अपेक्षाकृत अज्ञात थे, अब सबसे तेजी से बढ़ते पर्यटन क्षेत्रों में से हैं।”
उन्होंने कहा, “.... पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर कश्मीर सीमा पर्यटन, चाहे हम तंगधार, माछिल, करनाह या केरन की बात करें, इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। जम्मू-कश्मीर में बंगस और दूधपथरी जैसे घास के नए मैदान हैं।”
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