देश की खबरें | यह हमेशा टेनिस के बारे में नहीं होता, टीम के माहौल में विश्वास महत्वपूर्ण है: डेविस कप कोच आशुतोष

नयी दिल्ली, 29 अगस्त भारत के डेविस कप कोच आशुतोष सिंह इस पद पर नए हैं लेकिन राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के लिए वह अनजान नहीं हैं।

अनुभवी जीशान अली के अचानक इस्तीफे के बाद खाली हुए इस पद के लिए जब उनका नाम संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आया तो शीर्ष खिलाड़ियों को आशुतोष के नाम पर सहमत होने में ज्यादा समय नहीं लगा।

आशुतोष सिंह देश के शीर्ष खिलाड़ियों के वर्षों से संपर्क में रहे हैं। वह उनसे उनके मुकाबलों के बारे में बात करते हैं, अपना नजरिया रखते हैं और संयम से उनकी बातें भी सुनते हैं।

आशुतोष 41 साल के हैं और भारत के सबसे युवा डेविस कप कोच हैं।

पीटीआई के साथ बात करते हुए आशुतोष ने अपनी कोचिंग, दृष्टिकोण और कार्यशैली को साझा किया।

आशुतोष ने कहा, ‘‘कई बार यह टेनिस के बारे में होता ही नहीं है। यह तकनीकी पहलू नहीं होता।‘’’

उन्होंने कहा, ‘‘कई बार खिलाड़ियों अपने निजी जीवन में किसी चीज से गुजर रहा होता है क्योंकि टूर काफी अकेलेपन वाली जगह है, उन्होंने ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो उनकी बात सुन सके। उन्हें सहज रखे।’’

आशुतोष ने कहा कि किसी भी टीम स्थिति में मानव-प्रबंधन बड़ी भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ियों के पास ऐसे लोग (सहयोगी स्टाफ में) होंगे जो आपकी नियमित टीम का हिस्सा नहीं हैं। कम से कम आप खिलाड़ियों को उस तरह की सहजता का अहसास तो दे सकते हैं कि कोई ऐसा व्यक्ति है जिस पर मैं भरोसा कर सकता हूं।’’

खेल में विशेषज्ञता, रणनीति तैयार करना और उन्हें लागू करने की क्षमता बहुत जरूरी है जिसके बिना आप सम्मान नहीं कमा सकते और खिलाड़ियों का विश्वास जीतना आशुतोष की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आशुतोष को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले की तैयारी के लिए भारतीय टीम की सहायता करने के लिए बुलाया गया था। दिल्ली में प्रशिक्षण शिविर के दौरान उन्होंने खिलाड़ियों को जो जानकारी दी, उसकी बहुत सराहना की गई और इसने खिलाड़ियों को उनकी उम्मीदवारी के लिए सहमत होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘घास के मैदान पर तेज परिस्थितियों में मेरा पिछला अनुभव, मेरे से संपर्क करने से पहले उनके दिमाग में रहा होगा। साथ ही मेरे लगभग सभी खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत रिश्ते हैं। मुझे पाकिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान में खेलने का भी काफी अनुभव है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इससे मदद मिली क्योंकि मैं सभी खिलाड़ियों, विशेषकर बाला (एन श्रीराम बालाजी) और राम (रामकुमार रामनाथन) से उनकी एकल तैयारी के बारे में बात करने में सक्षम था। मैंने शिविर के दौरान कोर्ट पर तैयारी के बारे में जानकारी साझा की थी।’’

आशुतोष ने कहा, ‘‘उनमें से ज्यादातर मेरे दोस्त हैं इसलिए यह बहुत सौहार्दपूर्ण, बहुत आश्वस्त करने वाली स्थिति थी। खिलाड़ी मेरी हर सलाह पर ध्यान दे रहे थे।’’

लेकिन आशुतोष के पक्ष में जो बात रही वह यह है कि खिलाड़ियों के साथ पूरे साल उन्होंने बात की जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह उनकी ‘आदत’ का हिस्सा है और इसमें कोई पूर्व-निर्धारित उद्देश्य नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘‘बातचीत उस समय महत्वपूर्ण है जब वे (खिलाड़ी) कठिन दौर से गुजर रहे हों और उन्हें हार का सामना करना पड़ रहा हो क्योंकि जब वे जीत रहे होते हैं तो संपर्क में रहना आसान होता है। कभी-कभी, एक पूर्व खिलाड़ी के रूप में मुझे लगता है, जब आप अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे होते हैं, तो आपको सबसे ज्यादा समर्थन की जरूरत होती है।’’

आशुतोष ने कहा, ‘‘यह मेरा व्यक्तित्व है। संपर्क में रहना। कभी-कभी मैं मनीष सुरेशकुमार से भी बात करता हूं क्योंकि जब तक खिलाड़ी को यह महसूस नहीं होता कि आप उनसे जुड़ रहे हैं, तब तक वे टीम की स्थितियों में आपके साथ खुलकर बात नहीं करेंगे। क्योंकि किसी भी टीम स्थिति में आपको एक सहज, सुकून भरे माहौल की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘कई बार मैंने महसूस किया है कि वे मेरे साथ खुलकर बात करते हैं। वे निजी बातचीत होती हैं, मैं ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता।’’

आशुतोष ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में उन्हें अपने विचार साझा करने के लिए किसी की जरूरत महसूस होती है। कोई ऐसा व्यक्ति जो पूरे साल उस क्षमता में खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध हो, ना कि कभी-कभार या जब वे शानदार प्रदर्शन करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘रोहन (बोपन्ना) के साथ भी। मैं हर समय उन्हें शुभकामनाए देता हूं। एक कठिन मैच या कुछ और। जब मैं खेलता था, रोहन मेरे से सिर्फ दो साल बड़ा था। लेकिन एक जुड़ाव था। बस उन चीजों को लाने की कोशिश कर रहा हूं। और मुझे ऐसा करना पसंद है। यहां तक कि निक्की (पूनाचा) से भी मैं कभी-कभार संपर्क में रहता हूं।’’

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