देश की खबरें | कॉलेजियम सिफारिशों को मंजूरी देने में देरी से जुड़ी याचिकाओं का सूचीबद्ध न होना अजीब: याचिकाकर्ता

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र की ओर से देरी का आरोप लगाने वाले एक याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि यह “अजीब” है कि अदालत के 20 नवंबर के आदेश के बावजूद मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया।

नयी दिल्ली, पांच दिसंबर न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र की ओर से देरी का आरोप लगाने वाले एक याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि यह “अजीब” है कि अदालत के 20 नवंबर के आदेश के बावजूद मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया।

शीर्ष अदालत के पास दो याचिकाएं हैं, जिनमें से एक में कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में सरकार के देरी करने का आरोप लगाया गया है।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने 20 नवंबर को मामले की सुनवाई की थी और इसे आगे की सुनवाई के लिए मंगलवार को सूचीबद्ध करने को कहा था।

याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व कर रहे एक वकील ने पीठ के समक्ष मुद्दे का उल्लेख किया और कहा कि याचिकाएं आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जानी थीं, लेकिन वाद सूची से हटा दी गईं।

न्यायमूर्ति कौल ने वकील से कहा, “मैंने उन्हें नहीं हटाया है।”

बाद में, एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “यह अजीब है कि इसे हटा दिया गया है।”

न्यायमूर्ति कौल ने भूषण से कहा, “आपके मित्र ने सुबह (मुद्दे का) उल्लेख किया था। मैंने सिर्फ एक बात कही थी, मैंने वह मामला हटाया नहीं है।”

जब भूषण ने कहा कि अदालत को रजिस्ट्री से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, तो न्यायमूर्ति कौल ने उनसे कहा, “मुझे यकीन है कि प्रधान न्यायाधीश को इसकी जानकारी है।”

भूषण ने कहा कि यह बहुत असामान्य है कि मामले को हटा दिया गया, जबकि इसे आज सूचीबद्ध करने का न्यायिक आदेश था।

न्यायमूर्ति कौल ने वरिष्ठ वकील से कहा, “कई बार कुछ बातों को अनकहा छोड़ देना ही बेहतर होता है।”

भूषण ने कहा कि यह मामला काफी समय से न्यायमूर्ति कौल की अगुवाई वाली पीठ देख रही है।

न्यायमूर्ति कौल ने कहा, “इसलिए मैं स्पष्ट करता हूं कि ऐसा नहीं है कि मैंने मामला हटा दिया है या मैं इस मामले को सुनने का इच्छुक नहीं हूं।”

शीर्ष अदालत ने 20 नवंबर को मामले की सुनवाई करते हुए कॉलेजियम द्वारा स्थानांतरण के लिए अनुशंसित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को केंद्र द्वारा “चुनने” के मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि इससे अच्छा संकेत नहीं जाएगा।

कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति, जहां न्यायाधीश संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं, उच्चतम न्यायालय और केंद्र के बीच तनातनी का एक मुद्दा बन गया है। इस तंत्र की विभिन्न क्षेत्रों से आलोचना हो रही है।

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