देश की खबरें | गगनयान परियोजना में जल्दबाजी नहीं करने का लिया गया है निर्णय: इसरो प्रमुख सोमनाथ

बेंगलुरु, आठ जून भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपनी गगनयान परियोजना में जल्दबाजी नहीं करने का फैसला किया है क्योंकि वह सुनिश्चित करना चाहता है कि ‘मानव को अंतरिक्ष में भेजने का देश का पहला मिशन’ सफल और सुरक्षित रहे। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने यहां बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

सोमनाथ ने ‘स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस’ (एसएमओपीएस-2023) पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि गगनयान को 2022 में अंतरिक्ष में भेजा जाना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते इसमें देर हो गई।

इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारी एक अलग सोच है। हमारी सोच यह है कि हम जल्दबाजी नहीं करना चाहते। हमने यह फैसला किया है। मानव को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन का प्राथमिक लक्ष्य एक सफल और सुरक्षित मिशन है।’’

अंतरिक्ष एजेंसी ने मिशन को इस तरह से पुनर्निर्धारित किया है कि यह अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ले। इसके लिए, इसने हाल के समय में जांच और प्रदर्शन में वृद्धि की गई है।

सोमनाथ के अनुसार, पहला अभ्यास संभवत: अगस्त में किया जाएगा, जो पहले जुलाई में किये जाने का कार्यक्रम था।

इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘...मानवरहित मिशन को अगले साल की शुरूआत तक भेजा जाना संभव है।’’

उन्होंने कहा कि इसरो के अंदर इंजन की सभी जांच पूरी कर ली गई है।

सोमनाथ ने कहा कि जोरशोर से मिशन संबंधी गतिविधियां की जा रही हैं और हर हफ्ते कुछ बड़ी जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘आठ बड़ी जांच होनी है और यदि ये सभी जांच बगैर किसी गड़बड़ी के सफलतापूर्वक पूरी हो जाती है तो प्रक्षेपण 2024 और 2025 के बीच किया जाएगा। लेकिन यदि मैं समस्याओं और चुनौतियों का सामना करूंगा तो मुझे कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ेगा।’’

भारत के प्रथम सौर मिशन आदित्य-एल1 के बारे में सोमनाथ ने कहा कि इसका प्रक्षेपण अगस्त 2023 से जनवरी 2024 के बीच किये जाने का कार्यक्रम है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम इसे अगस्त में प्रक्षेपित नहीं कर सकें तो हम अगले साल जनवरी में यह करेंगे।’’

इसरो के तीसरे चंद्र अभियान, चंद्रयान-3, के बारे में सोमनाथ ने कहा कि इसे मध्य जुलाई में प्रक्षेपित किया जाना है। इसरो चंद्रयान-2 मिशन के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया का पालन करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम चंद्रयान-2 के रास्ते पर ही आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि हम पहले भी ऐसा कर चुके हैं। हमें इसका अनुभव है, लेकिन यह सब अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। लैंडिंग अभियान पूर्व की तरह ही किया जाएगा। कोई बदलाव नहीं किया गया है।’’

स्वदेश विकसित चंद्रयान-3 के बारे में एक सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘इसरो में हम जो कुछ कर रहे हैं, वह शत प्रतिशत स्वदेशी है। हम इसे पूरा करने के लिए किसी से कुछ खरीद रहे हैं, हालांकि हम बेशक इलेक्ट्रॉनिक चिप, प्रोसेसर, कुछ उपकरण जैसी चीजें खरीद रहे हैं। लेकिन हम चंद्रयान लैंडर किसी ने नहीं खरीद रहे हैं।’’

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