खेल की खबरें | रोहतक सम्मेलन में खेलों में महिला खिलाड़ियों से जुड़े मुद्दे उठाए गए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Sports at LatestLY हिन्दी. भारतीय महिलाओं ने पिछले एक दशक में खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन दिग्गज हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल सहित पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों ने शुक्रवार को यहां कहा कि खेलों में अब भी महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर जागरूकता की कमी है और यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है।

रोहतक, 29 नवंबर भारतीय महिलाओं ने पिछले एक दशक में खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन दिग्गज हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल सहित पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों ने शुक्रवार को यहां कहा कि खेलों में अब भी महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर जागरूकता की कमी है और यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है।

रानी, ​​​​विश्व चैंपियन मुक्केबाज नीतू गंघास, राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी और पूर्व हॉकी खिलाड़ी प्रीतम रानी सिवाच उन प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा आयोजित एकदिवसीय सम्मेलन में भाग लिया जिसका विषय ‘खेलों में महिलाओं के मुद्दे’ था।

रानी ने कार्यक्रम से इतर पीटीआई से कहा,‘‘यह पहला अवसर है जबकि साइ ने किसी कार्यक्रम में खेलों में महिलाओं के मुद्दे को उठाया है। यह महत्वपूर्ण बात है क्योंकि हम कभी भी महिलाओं के मुद्दों के बारे में बात नहीं करते हैं जबकि हमें ऐसा करने की ज़रूरत है ताकि युवा महिला खिलाड़ियों को पता चल सके कि उन्हें अपने सामने आने वाली चुनौतियों का कैसे सामना करना है।’’

उन्होंने कहा,‘‘एक खिलाड़ी के रूप में मैंने इन सभी समस्याओं का सामना किया है और इसलिए मैं इस तरह की चुनौतियों का सामने करने वाली खिलाड़ियों की मदद करने की पूरी कोशिश करती हूं।’’

दिन भर चले कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धा से पहले के तनाव और चिंता से निपटने के तरीके, खेलों में लैंगिक समानता, महिला खिलाड़ियों में हार्मोन परिवर्तन और मासिक धर्म संबंधी अनियमितताओं पर सत्र आयोजित किए गए।

अन्नू ने कहा, ‘‘यह शानदार पहल है क्योंकि हमें महिलाओं के मुद्दों पर बात करने में अजीब लगता है। खेलों में महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जब महिला खिलाड़ियों को मासिक धर्म होता है तो उन्हें दर्द होता है या वे अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाती हैं।’’

उन्होंने कहा,‘‘ कभी-कभी लड़कियां सोचती हैं कि यह केवल उनके साथ हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसे स्कूलों में भी पढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि कई महिला खिलाड़ी गांव से आती हैं और उनके माता-पिता भी इनमें से अधिकतर चीजों को लेकर अनभिज्ञ होती हैं।’’

इस अवसर पर नीतू ने कहा, ‘‘कई बार हम अपनी समस्याओं को लेकर अपने परिवार और यहां तक की अपनी सहेलियों के साथ भी बात नहीं कर पाती हैं। इसलिए इन मुद्दों पर बात करने के लिए यह बहुत अच्छा मंच है। इससे एक खिलाड़ी के रूप में हमें आगे बढ़ाने में इससे मदद मिलेगी।’’

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