हाल के हफ्तों में नेतन्याहू के खिलाफ कई प्रदर्शन हुए हैं जिनमें प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से शासन कर रहे प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा है जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कोरोना वायरस संकट से निपटने के नेतन्याहू के तरीके पर भी विरोध जताया है। प्रधानमंत्री ने इन प्रदर्शनों को “अराजकतावादियों” और “वामपंथियों” का अड्डा बताया है जिनके जरिए वे ‘‘एक मजबूत दक्षिणपंथी नेता” को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं।
ये प्रदर्शन मुख्यत: शांतिपूर्ण रहे हैं। कुछ मामलों में ये प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प का रूप लेकर समाप्त हुए हैं।
वहीं कुछ अन्य मामलों में, नेतन्याहू समर्थकों के छोटे-छोटे समूह और धुर दक्षिणपंथी समूहों से संबद्ध व्यक्तियों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया है।
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कैबिनेट की बैठक में नेतन्याहू प्रदर्शनों को “भड़काने” और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर गलत बयानी करने के लिए मीडिया पर जमकर बरसे।
उन्होंने कहा, “इस तरह की विकृत लामबंदी कभी नहीं हुई ।”
नेतन्याहू ने कहा कि मीडिया ने “प्रधानमंत्री और उनके परिवार की हत्या करने के उग्र एवं निरंकुश उकसावे को नजरअंदाज किया।”
उन्होंने यह भी कहा कि ये प्रदर्शन वायरस के प्रसार को बढ़ावा देने वाले स्थान हैं जहां किसी तरह के नियम का पालन नहीं हो रहा है।
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