विदेश की खबरें | इजराइल : न्यायिक सुधार विधेयक पर मतदान से पहले नेतन्याहू का पेसमेकर प्रतिरोपण ऑपरेशन हुआ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है, जब विवादास्पद ‘न्यायिक सुधार’ विधेयक पर देश की संसद में अगले कुछ दिनों में मतदान होने वाला है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है, जब विवादास्पद ‘न्यायिक सुधार’ विधेयक पर देश की संसद में अगले कुछ दिनों में मतदान होने वाला है।

पेसमेकर प्रतिरोपण ऑपरेशन से एक सप्ताह पहले नेतन्याहू को शरीर में पानी की कमी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उनके शरीर में हृदयगति पर नजर रखने वाला एक उपकरण प्रतिरोपित किया गया था।

नेतन्याहू का पेसमेकर प्रतिरोपण ऑपरेशन रविवार तड़के रामत गन स्थित ‘शेबा मेडिकल सेंटर’ में हुआ।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा और नेतन्याहू अच्छा महसूस कर रहे हैं तथा उन्हें रविवार को ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

पेसमेकर एक ऐसा उपकरण है, जो हृदयगति को नियमित करने में मदद करता है।

अमेरिकी अस्पताल ‘मेयो क्लीनिक’ और ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के मुताबिक, पेसमेकर प्रतिरोपण की प्रक्रिया में आमतौर पर कई घंटे लगते हैं और ज्यादातर मामलों में मरीज को उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि नेतन्याहू के ऑपरेशन के दौरान उप प्रधानमंत्री एवं विधि मंत्री यारिव लेविन ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी।

नेतन्याहू का ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है, जब रविवार सुबह विधेयक पर संसद में बहस होनी है और सोमवार एवं मंगलवार को इसे दूसरी, तीसरी और अंतिम बार पढ़ा जाएगा।

इस विधेयक को लेकर देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो उच्चतम न्यायालय से सरकारी फैसलों को ‘अनुचित’ घोषित करने की शक्ति छिन जाएगी, जो देश की सरकार को निरंकुश बनने से रोकने में मदद करने वाले प्रावधानों में से एक है। देश का संविधान लिखित नहीं है।

इससे पहले नेतन्याहू ने आधी रात के बाद एक वीडियो रिकॉर्ड करके संक्षिप्त बयान दिया था कि वह ‘बहुत अच्छा महसूस’ कर रहे हैं और अस्पताल से छुट्टी मिलते ही न्यायिक बदलाव की अपनी योजना को आगे बढ़ाएंगे।

नेतन्याहू और उनके धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों ने पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों बाद जनवरी में इस योजना की घोषणा की थी। उनका दावा है कि अनिर्वाचित न्यायाधीशों को हासिल अत्यधिक शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए इसकी आवश्यकता है।

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