देश की खबरें | आईपीआर विवाद निजी लग सकते हैं, लेकिन इसमें जनहित का तत्व शामिल होता है: न्यायमूर्ति डी एन पटेल

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नयी दिल्ली, 26 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल ने शनिवार को कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के विवाद प्रकृति में निजी लग सकते हैं, लेकिन उनमें जनहित भी शामिल होता है।

"भारत में आईपीआर विवादों के अधिनिर्णय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी" में स्वागत भाषण देते हुए, न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि बौद्धिक संपदा के संरक्षण में न केवल व्यावसायिक अवसर शामिल होते हैं, बल्कि निर्माता की मानसिक संतुष्टि की भावना भी शामिल होती है।

उन्होंने कहा, "आईपीआर एक साधारण विषय नहीं है, यह क्षेत्र निस्संदेह जटिल है, जिसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। निस्संदेह, बौद्धिक संपदा से संबंधित विवाद प्रकृति में निजी लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में, ज्यादातर मामलों में उनमें सार्वजनिक हित के तत्व भी शामिल होते हैं।’’

इस संगोष्ठी में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमण मुख्य अतिथि थे, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विशिष्ट अतिथि थीं। इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय, विभिन्न उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के न्यायाधीश, अधिवक्ता और नौकरशाह भी उपस्थित थे।

न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली हमेशा आईपीआर मामलों का केंद्र रही है और आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2000 से अब तक लगभग 11,000 आईपीआर मामले दायर किए गए हैं और उनमें से लगभग 90 प्रतिशत का अब तक निपटारा किया जा चुका है।

इस मुद्दे पर एक तथ्यात्मक पृष्ठभूमि देते हुए, न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (आईपीएबी) को समाप्त कर दिया गया था और अंततः, ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 लागू हुआ, जिसने उच्च न्यायालयों को इस विषय से उत्पन्न होने वाली अपीलों को सुनने का अधिकार दिया।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने "विज़न ऑफ़ आईपी डिवीजन" पर शुरुआती टिप्पणी करते हुए कहा कि हालिया प्रवृत्ति ट्रेडमार्क और कॉपीराइट मामलों में वृद्धि दर्शाती है और भारत अपनी विविधता के कारण निर्माता कार्यों का सबसे बड़ा सृजनकर्ता है।

उन्होंने कहा कि यह एक गलत धारणा है कि बौद्धिक संपदा एक अभिजात्य क्षेत्र है और केवल अमीर लोगों के लिए है। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत से अधिक ट्रेडमार्क घरेलू व्यवसायों से संबंधित हैं।

न्यायमूर्ति सिंह ने आगे कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद से, दिल्ली उच्च न्यायालय को 300 नए पेटेंट मामले मिले हैं और बौद्धिक संपदा व्यवस्था के मानकों से पता चलता है कि देश प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों में सुधार करते हुए अपनी प्रणालियों में सुधार करने का प्रयास करना चाहिए।

सुरेश अमित

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