जरुरी जानकारी | पी-नोट के जरिये निवेश जून में बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये पर

नयी दिल्ली, दो अगस्त भारतीय पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट (पी-नोट) के जरिये होने वाला निवेश जून के अंत में बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साढ़े पांच वर्षों का उच्चतम स्तर है।

इस राशि में पी-नोट्स के जरिये भारत के इक्विटी, ऋण एवं हाइब्रिड प्रतिभूतियों में किए गए निवेश शामिल हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़े बताते हैं कि पी-नोट के माध्यम से निवेश में बढ़ोतरी लगातार चौथे महीने जारी रही है।

पी-नोट को सेबी के पास पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) उन विदेशी निवेशकों को जारी करते हैं जो यहां सीधे तौर पर पंजीकृत हुए बगैर निवेश करना चाहते हैं। हालांकि इन विदेशी निवेशकों को समुचित जांच-पड़ताल की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

सेबी के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय बाजारों में पी-नोट के जरिये किए गए निवेश का मूल्य जून के अंत में 1,11,291 करोड़ रुपये हो गया जो मई के अंत में 1,04,585 करोड़ रुपये था।

इसके पहले अप्रैल के अंत में यह राशि 95,911 करोड़ रुपये और मार्च के अंत में 88,600 करोड़ रुपये रही थी।

जून के अंत में पी-नोट से हुआ निवेश जनवरी, 2018 के बाद का उच्चतम स्तर है। उस समय पी-नोट के जरिये 1.19 लाख करोड़ रुपये का निवेश भारतीय बाजारों में हुआ था।

जून में पी-नोट्स के जरिये आए निवेश में से 1,00,701 करोड़ रुपये इक्विटी बाजार में आए जबकि 12,382 करोड़ रुपये ऋण प्रतिभूतियों और 203 करोड़ रुपये हाइब्रिड प्रतिभूतियों में लगाए गए।

एफपीआई निवेश में तेजी आने पर आम तौर पर पी-नोट के जरिये आने वाले निवेश में भी बढ़ोतरी होती है। एफपीआई के अधीन परिसंपत्तियों का आकार जून में बढ़कर 55.63 लाख करोड़ रुपये हो गया जो मई में 52.95 लाख करोड़ रुपये था।

बाजार विश्लेषकों ने कहा कि पी-नोट निवेश में इस तेजी के पीछे अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता की अहम भूमिका है। इसके अलावा चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती ने भी विदेशी निवेशकों को भारत की तरफ आकर्षित करने का काम किया है।

प्रेम

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