मुंबई, 16 नवंबर बम्बई उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी मामले की जांच केवल इसलिए पुलिस से किसी विशेष एजेंसी को स्थानांतरित नहीं की जा सकती क्योंकि जांच किसी एक संबंधित पक्ष को ‘‘रास नहीं’’ आ रही है।
न्यायमूर्ति एन. डब्ल्यू. साम्ब्रे और न्यायमूर्ति एन. आर. बोरकर की खंडपीठ ने छह नवंबर को कहा कि एक जांच एजेंसी पर बोझ नहीं डाला जा सकता है और निष्पक्ष तथा त्वरित जांच के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी कोणों से जांच करना जरूरी है।
पीठ ने भाग्यश्री मोटे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी 32 वर्षीय बहन की मौत की जांच पुलिस से लेकर महाराष्ट्र आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा कि केवल इसलिए कि जांच पुलिस से लेकर किसी विशेष एजेंसी को स्थानांतरित नहीं की जा सकती, क्योंकि यह किसी एक संबंधित पक्ष को ‘‘रास नहीं’’ आ रही है ।
मोटे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसकी बहन की उसके ससुराल वालों ने हत्या कर दी, जबकि पुलिस ने मौत में किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया है और कहा कि मौत दिल की बीमारी के कारण हुई थी।
याचिकाकर्ता की बहन मधु की इस साल मार्च में मौत हो गई थी। इससे एक महीने पहले उसके पति की यकृत की बीमारी के कारण मौत हो गई थी।
मोटे ने आरोप लगाया कि उसकी बहन की हत्या कर दी गई क्योंकि उसके ससुराल वाले उसे संपत्ति का हिस्सा नहीं देना चाहते थे।
उच्च न्यायालय ने जांच दस्तावेजों पर गौर करने के बाद कहा कि पुलिस ने विस्तृत जांच की है और हर संभावना पर गौर किया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY